94 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
अनुच्छेद 107 10. उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयः यूनाइटेड किंगडम और 200 और संयुक्त राज्य अमेरिका में विद्यमान परिपाटी का अनुसरण करते
हुए समिति का प्रस्ताव है कि परिस्थितियों में सेवानिवृत्त न्यायाधीश
उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय दोनों में खास मामलों में
सेवा के लिए आंमंत्रित किए जा सकते हैं।
अनुच्छेद 131 11. राज्यपालों के चयन का ढंगः समिति के कुछ सदस्य
यह महसूस करते हैं कि जनता द्वारा चुने गए राज्यपाल और
विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी मुख्यमंत्री के साथ-साथ होने से
मनमुटाव हो सकता है। इसलिए समिति ने राज्यपालों की नियुक्ति
का एक दूसरा ढंग सुझाया हैः विधानमंडल चार व्यक्तियों को
चुनकर उनका पैनल बनाये। जरुरी नहीं है कि वे उसी राज्य
के निवासी हों और संघ के राष्ट्रपति उन चार में से एक को
राज्यपाल नियुक्त करे।
अनुच्छेद 138 12. उपराज्यपालः समिति ने उपराज्यपालों के लिए कोई काम
नहीं समझा है क्योंकि राज्यपाल के रहते उपराज्यपाल का कोई
काम नहीं होगा। केन्द्र में स्थिति भिन्न है, क्योंकि उपराष्ट्रपति
राज्यसभा का पदेन सभापति भी होगा, अधिकांश राज्यों में उच्च
सदन नहीं होगा अतः उपराज्यपाल को उपराष्ट्रपति जैसे कृत्य
देना संभव नहीं होगा। प्रारुप संविधान में एक उपबंध है जिसके
अनुसार राज्य का विधानमंडल या राष्ट्रपति किसी भी आकस्मिक
स्थिति में राज्यपाल के कृत्यों के निर्वहन के लिए आवश्यक
इंतजाम कर सकता है।
अनुच्छेद 212 13. केन्द्र शासित क्षेत्रः संविधान सभा के एक संकल्प के से 214 अनुसार आपने सभापति की हैसियत से केन्द्रशासित क्षेत्रों जैसे
दिल्ली, अजमेर, मारवाड़, कुर्ग, पंथ पिपलोदा तथा अंडमान और
निकोबार द्वीपसमूह में संवैधानिक परिवर्तन करने की सिफारिश के
प्रयोजन से एक 7 सदस्यीय समिति नियुक्त की थी। समिति ने
अपनी रिपोर्ट 21 अक्तूबर, 1948 को पेश की। समिति की
सिफारिशें, संक्षेप में, इस प्रकार थीः-
(1) दिल्ली, अजमेर, मारवाड़ और कुर्ग में से प्रत्येक प्रांत में
एक उपराज्यपाल होना चाहिए जिसे भारत के राष्ट्रपति द्वारा
नियुक्त किया जाए।