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96 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

है_ कुर्ग का प्रशासन या तो मद्रास के राज्यपाल के जरिये या मैसूर के शासक के जरिये कुर्ग लोगों की इच्छा जानने के बाद कर सकता है। वह आदेश द्वारा, एक स्थानीय विधानमंडल या सलाहकार परिषद बना सकता है जिसके गठन, शक्तियों और कृत्यों के बारे में आदेश में उल्लेख किया जाए। प्रारुपण समिति को यह एक लचीली योजना प्रतीत होती है जिसे संबंधित क्षेत्र की विविध अपेक्षाओं के अनुरुप ढाला जा सकता है।

समिति ने यह भी प्रावधान किया है कि ऐसी रियासतों (जैसे उड़ीसा समूह की) जिन्होंने पूर्ण और अनन्य प्राधिकार, अधि कारिता और शक्तियाँ केन्द्रीय सरकार के हाथों में सौंप दी हैं, प्रशासन उसी प्रकार किया जा सकता है मानों वे केन्द्र शासित क्षेत्र हों जैसे हर राज्य की आवश्यकताओं के अनुसार मुख्य आयुक्त या उपराज्यपाल के माध्यम से या पड़ोसी राज्य के राज्यपाल या शासक के माध्यम से।

अनुच्छेद 216 14. विधायी शक्तियों का विभाजनः अधिकांश, प्रारुपण से 232  समिति ने उन विधायी सूचियों में कोई परिवर्तन नहीं किया है जिनकी सिफारिश संघ शक्ति समिति ने ली थी और जिन्हें संविधान सभा ने अंगीकार किया था, लेकिन मैं तीन बातों की ओर आपका ध्यान

खीचना चाहूँगा जिनके बारे में समिति ने परिवर्तन किए हैं। वे हैं-

(क) समिति ने वस्तुतः उपबंध किया है कि जब कोई विषय जो सामान्य तौर पर राज्य सूची में है, राष्ट्रीय महत्व का हो जाता है तो संघ संसद उस पर विधान बना सकती है। राज्य शक्तियों पर कोई अतिक्रमण न हो इससे बचने के लिए समिति ने प्रारुप में यह उपबंध किया है कि यह तभी किया जा सकता है जब राज्यसभा जो इकाइयों के रुप में राज्यों की प्रतिनिधि कहीं जा सकती हैं, दो तिहाई बहुमत से इस आशय का एक संकल्प पारित करें।

(ख) समिति ने वांछनीय समझा कि कृषि भूमि के अलावा संपत्ति के उत्तराधिकार के बजाय उत्तराधिकार के संपूर्ण विषय को समवर्ती सूची में रखा जाए। इसी प्रकार, समिति ने वे सब विषय समवर्ती सूची में रखे हैं जिनकी बाबत अब मुकदमे के पक्षकारों पर स्वीय विधि लागू होती है। इससे इन विषयों में भारत के लिए एकरूप विधि बनाना आसान हो जाएगा।