अनुच्छेद - Page 116

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(ग) भूमि अर्जन को संघ के लिए संघीय सूची में और राज्य

के प्रयोजनों के लिए राज्य सूची में रखते हुए समिति ने उपबंध

किया है कि अर्जन का प्रतिकर तय करने के सिद्धांत हर हालत

में समवर्ती सूची में रखे जाएंगे ताकि इस विषय में कुछ एकरुपता

रह सके। इसके अतिरिक्त, वर्तमान असाधारण परिस्थितियों की

दृष्टि से जिनमें अनिवार्य प्रदायों में ‘सप्लाई’ नियंत्रण अपेक्षित

है, समिति ने उपबंध किया है कि संविधान के प्रारंभ से पांच

वर्ष तक अनिवार्य वस्तुओं में व्यापार और वाणिज्य तथा उनका

उत्पादन, प्रदाय और वितरण एवं विस्थापित व्यक्तियों के लिए

राहत और पुनर्वास भी समवर्ती सूची के विषयों जैसे होगे। इस

मार्ग को अपनाने में समिति ने इंडिया सेन्ट्रल गवनर्मेन्ट एंड

लेजिस्लेचर एक्ट, 1946 के उपबंधों का अनुसरण किया है।

अनुच्छेद 247 15. वित्तीय उपबंधः व्यापक रुप से कहें तो प्रारुपण समिति ने से 269 प्रारुप में केन्द्र और राज्यों के बीच राजस्व के वितरण विषयक

उपबंध के सिवाय, विशेषज्ञ वित्त समिति की सिफारिशों का

समावेश किया है। इस क्षेत्र में इस समय जो अस्थिर हालात

विद्यमान है उनकी दृष्टि से प्रारुपण समिति ने पांच वर्ष तक

राजस्व के वितरण के विषय में यथापूर्ण स्थिति बनाये रखना

सबसे अच्छा समझा हैं। उसके अंत में एक वित्त आयोग स्थिति

की समीक्षा कर सकता है।

अनुच्छेद 281 16. सेवाएंः समिति ने सेवाओं विषयक विस्तृत उपबंधों को से 283  संविधान में शामिल करना ठीक नहीं समझा। समिति का विचार

है कि वे सांविधानिक उपबंधों के बजाय समुचित विधानमंडल

के अधिनियमों द्वारा विनियमित की जाएंगी क्योंकि समिति यह

महसूस करती है कि दूसरे देशों की भांति यहां भी विधानमंडलों

पर सेवाओं के बारे में उचित रुप से व्यवस्था करने का विश्वास

किया जा सकता है।

अनुच्छेद 289 17. निर्वाचन मताधिकार आदिः समिति ने निर्वाचन क्षेत्रों के से 291 परिसीमन सहित निर्वाचन विषयक विस्तृत उपबंधों को संविधान में

समाविष्ट करना आवश्यक नहीं समझा। इन्हें सहायक विधान के

लिए छोड़ दिया गया है।

अनुच्छेद 304 18. संविधान का संशोधनः समिति ने कुछ विषयों की बाबत