98 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
राज्य विधानमंडल को सीमित संवैधानिक शक्ति देने वाला उपबंध
शामिल किया है।
अनुच्छेद 292, 19. अल्पसंख्यकों के लिए रक्षोपायः प्रारुप में विधानमंडलों में 294 और 305 स्थानों और लोक सेवाओं में पदों के आरक्षण की बाबत संविधान
सभा एवं सलाहकार समिति के विनिश्चय लेखबद्ध हैं। हालांकि ये
उपबंध देशी रियासतों पर लागू नहीं होते हैं फिर भी भारत के हित
में देशी रियासतों को वहां के अल्पसंख्यकों के लिए ऐसे ही उपबंध
अपनाने चाहिए। प्रारुपण समिति ने मुझसे विशेष रुप से कहा है कि
मैं इस विषय की ओर आपका ध्यान आकृष्ट करुं।
प्रथम अनुसूची 20. भाषाई प्रांतः मैं प्रथम अनुसूची के भाग 1 और उसके बाद
टिप्पणी के प्रति विशेष ध्यान चाहूँगा। यदि आंध्र अथवा किसी
अन्य भाषाई क्षेत्र को इस अनुसूची में संविधान के अंतिम तौर
पर अपनाए जाने से पहले वर्णित कर दिया जाए तो हमें तुरंत
कदम उठाकार प्रारुप संविधान को अंतिम रुप से पारित किए
जाने से पहले उन्हें भारत शासन अधिनियम, 1935 की धारा
290 के अधीन पृथक राज्यपाल प्रांत बनाना होगा। निस्संदेह नये
संविधान में नये राज्य बनाने के लिए उपबंध हैं लेकिन यह तभी
होगा जब नया संविधान लागू हो जाएगा।
पांचवी और 21. अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित क्षेत्र और जनजाति क्षेत्रः छठी अनुसूची समिति ने इन विषयों की उपसमितियों की सिफारिशें संविधान की इन
अनुसूचियों में लेखबद्ध की हैं।
- कुछ मुद्दों पर जिनमें सिद्धांत का कोई प्रश्न नहीं है, श्री
अल्लादी कृष्ण स्वामी अय्यर द्वारा लेखबद्ध एक पृथक टिप्पणी के
प्रारुप को उनके अनुरोध पर परिशिष्ट के रुप में रखा गया है।
- इस प्रारुप संविधान को आप तक पहुंचाने से पूर्व मैं
श्री बी.एन.राव, संविधान सलाहकार श्री एस.एन.मुखर्जी, संयुक्त
सचिव और प्रारुपकार तथा संविधान के कर्मचारिवृंद से इस
दुःसाध्य कार्य में प्राप्त सहायता के लिए समिति का आभार
लेखबद्ध करना चाहूँगा।
आपका,
बी.आर.अम्बेडकर