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प्रारुप संविधान
भारत का राजपत्र, असाधारण, 26 फरवरी, 1948
प्रारुप
भारत का संविधान
उद्देशिका
हम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्वसंपन्न, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों कोः
सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 15 मई, 1948 ई ख्............................................., संवत दो हजार ख्.., ............................विक्रमी को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
यह संविधान सभा द्वारा किए गए फैसले के अनुसरण में है। लोकतंत्रात्मक गणराज्य और ब्रिटिश राष्ट्रमंडल में संबंध का प्रश्न का विनिश्चय बाद में किया जाना है।