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(क) या तो-
( i ) इस राज्य के विधानमंडल में राज्यक्षेत्र के प्रतिनिधियों के बहुमत द्वारा, जिसमें
से राज्यक्षेत्र पृथक या उपवर्जित करना है, इस निर्मित अभ्यावेदन राष्ट्रपति
से न किया गया हो_ अथवा
(ii) इस निमित्त एक संकल्प किसी राज्य के विधानमंडल द्वारा पारित न किया
गया हो जिसकी सीमाएं या जिसका नाम विधेयक में अंतर्विष्ट होने वाले
प्रस्ताव से प्रभावित होगा_ तथा
(ख) जहां विधेयक में अंतर्विष्ट प्रस्ताव से पहली अनुसूची के भाग 3 में विनिर्दिष्ट
राज्य से भिन्न किसी राज्य की सीमाएं या नाम प्रभावित होता हैं, वहां
विधेयक पुनःस्थापित करने के प्रस्ताव और उसके उपबंध दोनों की बाबत
इस राज्य के विधानमंडल के विचार राष्ट्रपति द्वारा अभिनिश्चित कर लिए
गए हों और जहां ऐसे प्रस्ताव से पहली अनुसूची के भाग 3 में तत्समय
विनिर्दिष्ट किसी राज्य की सीमाएं या नाम प्रभावित होता है, वहाँ प्रस्ताव
पर उस राज्य की सम्मति अभिप्राप्त कर ली गई हो।
पहली अनुसूची 4(1) इस संविधान के अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 में निर्दिष्ट के संशोधन तथा किसी विधि में पहली अनुसूची के संशोधन के लिए आनुषंगिक और उपबंध अंतर्विष्ट होंगे जो इस विधि के उपबंधों को पारिणामिक विषयों प्रभावी करने के लिए आवश्यक हों तथा ऐसे आनुषांगिक का उपबंध करने के और पारिणामिक उपबंध भी अंतर्विष्ट हो सकेंगे जिन्हें लिए अनुच्छेद 2 संसद आवश्यक समझे।
और 3 के अधीन (2) पूर्वोक्त प्रकार की कोई विधि अनुच्छेद 304 के प्रयोजनों बनाई गई विधियां के लिए इस संविधान में संशोधन योग्य नहीं समझी
जाएगी।
समिति का विचार है कि ब्रिटिश नॉर्थ अमेरिका एक्ट, 1867 की उद्देशिका की भाषा का अनुसरण
करते हुए यह अनुपयुक्त न होगा कि हम भारत का 75 उल्लेख संघ के रूप में करें, हालांकि उसके
संविधान का ढांचा परिसंघीय है।
समिति की राय है कि पहली अनुसूची के भाग 3 में विनिर्दिष्ट राज्य से भिन्न किसी राज्य की दशा
में, राज्य की पूर्व सम्मति आवश्यक नहीं है। राष्ट्रपति द्वारा उस राज्य के विधानमंडल के विचार प्राप्त
करना काफी होगा।