भाग-3 - मूल अधिकार - Page 122

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भाग-3

मूल अधिकार

साधारण

परिभाषा 7. इस भाग में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, ‘‘राज्य’’

के अंतर्गत भारत की सरकार और संसद तथा राज्यों में से प्रत्येक

राज्य की सरकार और विधानमंडल तथा भारत के राज्यक्षेत्र के

भीतर या भारत सरकार के नियंत्रण के अधीन सभी स्थानीय और

अन्य प्राधिकारी हैं।

व्यवृत्ति 8. (i) इस भाग के उपबंधों से असंगत भारत के राज्यक्षेत्र में, इस

संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले प्रवत सब विधियां इस मात्रा

तक शून्य होंगी जिस तक वे इस भाग के उपबंधों से असंगत

हैं।

(ii) राज्य ऐसी कोई विधि नहीं बनाएगा जो इस भाग द्वारा प्रदत्त

अधिकारों को छीनती है या न्यून करती है और इस खंड के

उल्लंघन में बनाई गई विधि उल्लंघन की मात्रा तक शून्य

होगी।

ऽपरंतु इस खंड की कोई भी बात राज्य के किसी विद्यमान

विधि से उत्पन्न होने वाली असमता, विषमता, अलाभ या विभेद

के निवारण के लिए कोई विधि बनाने से नहीं रोकेगी।

(iii) इस अनुच्छेद में, ‘‘विधि’’ शब्द के अंतर्गत कोई भी अध्यादेश,

आदेश, उपविधि, नियम, विनियम, अधिसूचना प्रथा या रुढि़

है जिसे भारत के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग में विधि का

बल प्राप्त हो।

* . परंतु इसलिए जोड़ा गया है ताकि राज्य किसी भी वर्तमान विभेद को दूर करने वाली विधियॉं बना सके। ऐसी विधियाँ इस अर्थ में अवश्यमेव विभेदकारी हों क्योंकि ये उनके खिलाफ लागू होंगी जो अब तक असम्यक् फायदा उठा रहे थे। प्रकट है कि इस स्वरूप की विधियों का प्रतिषेध नहीं होना चाहिए।