भाग-3 - मूल अधिकार - Page 123

104 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

समता का अधिकार

धर्म, मूलवंश, जाति 9 (1) राज्य किसी भी नागरिक के विरुद्ध केवल धर्म, मूलवंश, लिंग के आधार पर जाति, लिंग या इनमें से किसी के आधार पर कोई विभेद विभेद का निषेध नहीं करेगा, विशेष रुप से, कोई भी नागरिक केवल धर्म,

मूलवंश, जाति, लिंग या इनमें से किसी के आधार पर-

विभेद का निषेध (क) दुकानों, सार्वजनिक भोजनालयों, होटलों और सार्वजनिक

मनोरंजन के स्थानों में प्रवेश, या

(ख) पूर्णतः या भाग्यतः राज्य निधि से पोषित या साधारण

जनता के प्रयोग के लिए समर्थित कुओं, तालाबों,

स्नानघाटों, सड़कों और सार्वजनिक समागम के स्थानों के

उपयोग के संबंध में किसी भी निर्योग्यता दायित्व,

निर्बन्धन या शर्त के अधीन नहीं होगा।

(2) इस अनुच्छेद की कोई भी बात राज्य के स्त्रियों और

बालकों के लिए कोई विशेष उपबंध करने से निवारित

नहीं करेगी।

लोक नियोजन के 10. (1) राज्य के अधीन नियोजन के विषयों में सभी नागरिकों के विषय में अवसर लिए अवसर की समता होगी।

की समता

(2) राज्य के अधीन किसी पद के संबंध में केवल धर्म,

मूलवंश, जाति, लिंग, उद्भव, जन्म स्थान या इनमें से

किसी के आधार पर कोई भी नागरिक अपात्र नहीं होगा।

(3) इस अनुच्छेद की कोई बात राज्य केऽ पिछड़े हुए

नागरिकों के किसी वर्ग के पक्ष में जिनका प्रतिनिधित्व

राज्य की राय में, राज्य के अधीन सेवाओं में, पर्याप्त नहीं

हैं, नियुक्तियों या पदों के आरक्षण के लिए उपबंध करने

से निवारित नहीं करेगी।

(4) इस अनुच्छेद की कोई बात किसी ऐसी विधि के प्रवर्तन

पर प्रभाव नहीं डालेगी जो यह उपबंध करती है कि

* . समिति की राय है कि नागरिकों के ‘‘किसी भी वर्ग के’’ शब्दों से पूर्व ‘‘पिछड़े हुए’’ शब्द जोड़े

जाएं।