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किसी धार्मिक या सांप्रदायिक संस्था के कार्यकलाप से
संबंधित अथवा कोई सदस्य किसी विशिष्ट धर्म का
मानने वाला या विशिष्ट सम्प्रदाय का ही हो। अस्पृश्यता का अंत 11. अस्पृश्यता का अंत किया जाता है और उसका किसी भी
रुप में आचरण निषिद्ध किया जाता है। अस्पृश्यता से
उपजी किसी निर्योग्यता को लागू करना अपराध होगा जो
विधि के अनुसार दंडनीय होगा।
उपाधियों का अंत 12. (1) राज्य कोई उपाधि प्रदान नहीं करेगा।
(2) भारत का कोई नागरिक किसी विदेशी राज्य से कोई
उपाधि स्वीकार नहीं करेगा ।
(3) राज्य के अधीन लाभ या विश्वास का पद धारण करने
वाला कोई व्यक्ति किसी विदेशी राज्य से या उसके
अधीन किसी रुप में कोई भेंट, उपलब्धि, उपाधि या पद
राष्ट्रपति की सहमति के बिना स्वीकार नहीं करेगा।
वाक् स्वतंत्रय 13. (1) इस अनुच्छेद के अन्य उपबंधों के अधीन रखते
हुए-
आदि विषयक (क) वाक् स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति स्वातंत्र्य का, कुछ अधिकारों (ख) शांतिपूर्वक और निरायुध सम्मेलन का, का संरक्षण (ग) संगम या संघ बनाने का,
(घ) भारत के राज्यक्षेत्र में सर्वत्र अबाध संचरण का,
(ड.) भारत के राज्यक्षेत्र के किसी भाग में निवास
करने और बस जाने का,
(च) सम्पत्ति अर्जन, धारण और विक्रय करने
का, और
(छ) कोई वृत्ति, उपजीविका, व्यापार या कारोबार करने का, अधिकार होगा।
(2) इस अनुच्छेद के खंड (1) के उपखंड (क) की कोई
बात उक्त खंड द्वारा दिये गए अधिकार पर अपमान लेख,
अपमान वचन, मानहानि, राजद्रोह या किसी अन्य विषय
से संबंधित जो शिष्टाचार या सदाचार को न्यून करेगी
अथवा राज्य को कोई विधि बनाने से निवारित और
प्रभावित नहीं करेगी।