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किसी प्रवृत्त विधि का अतिक्रमण नहीं किया है या
उससे अधिक शक्ति का भागी नहीं होगा जो उस अपराध
के लिए जाने के समय प्रवृत्त विधि के अधीन अधिरोपित
की जा सकती थी।
(2) किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक बार से
अधिक दंडित नहीं किया जाएगा।
(3) किसी अपराध के लिए अभियुक्त किसी व्यक्ति को स्वयं
अपने विरुद्ध साक्षी होने के लिए बाध्य नहीं किया
जाएगा।
प्राण और दैहिक * 15. किसी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से स्वतंत्रता का संरक्षण विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया तथा विधि के जाएगा अन्यथा नहीं, और न ही किसी व्यक्ति को भारत समक्ष समता के राज्यक्षेत्र के अंदर विधि के समक्ष समता से या विधियों
के समान संरक्षण से वंचित किया जाएगा।
भारत के राज्यक्षेत्र ** 16. संविधान के अनुच्छेद 244 के और संसद द्वारा बनाई गई में सर्वत्र व्यापार, किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, भारत के वाणिज्य और समागम राज्यक्षेत्र में सर्वत्र व्यापार, वाणिज्य और समागम की की स्वतंत्रता स्वतंत्रता होगी।
मानव के दुर्व्यापार 17. (1) मानव का दुर्व्यापार और बेगार तथा इसी प्रकार का अन्य और बलात् श्रम का बलात् श्रम प्रतिषिद्ध किया जाता है और इस उपबंध का प्रतिषेध कोई भी उल्लंघन अपराध होगा जो विधि के अनुसार
दंडनीय होगा।
* . समिति की राय है कि स्वतंत्रता शब्द को उसके पहले दैहिक शब्द जोड़कर विशेषित किया जाना
चाहिए क्योंकि अन्यथा उसका अर्थ इतना व्यापक हो सकता है कि इसमें वे स्वतंत्रताएं भी शामिल
हो जाएंगी जिनका उल्लेख पहले अनुच्छेद 13 में किया जा चुका है।
समिति ने ‘‘विधि की सम्यक प्रक्रिया के बिना’’ शब्दों के स्थान पर ‘‘विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के
अनुसारर अन्यथा नहीं’’ शब्द भी रख दिए हैं क्योंकि पश्चात्कथित शब्द ज्यादा विनिर्दिष्ट हैं (देखिए
जापानीज़ कांस्टीट्यूशन, 1946 का अनुच्छेद XXX1 ), आयरिश कंस्टीट्यूशन में तत्स्थानी उपबंध इस
प्रकार है- ‘‘नो पर्सन शैल बी डिप्राइव्ड ऑफ हिज पर्सनल लिबर्टी सेव इन एकोरडेन्स विद लॉ।’’
समिति की यह भी राय है कि ‘‘या विधियों के समान संरक्षण’’ शब्द ‘‘विधि के समक्ष समता’’ शब्दों
के बाद जोड़े जाएं जैसा कि यू.एस.ए. कान्स्टीट्यूशन (1885) के अनुच्छेद XIV की धारा 1 में है। ** समिति ने ‘‘नागरिकों द्वारा और उनके बीच’’ शब्द हटा दिए हैं। ये शब्द संवधिन सभा द्वारा अंगीकृत
उपबंध में ‘‘व्यापार, वाणिज्य और समागम शब्दों के बाद आए हैं। विशेषण शब्दों से राज्य की सीमा
पर प्रेषक और प्रेषित की राष्ट्रीयता के बारे में विस्तृत जांच-पड़ताल करना आवश्यक हो सकता है।