भाग-3 - मूल अधिकार - Page 130

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सांविधानिक उपचारों का अधिकार

इस भाग द्वारा 25. (1) इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों को प्रवर्त्तित कराने के प्रदत्त अधिकारों लिये समुचित कार्यवाहियों द्वारा उच्चतम न्यायालय में को प्रवर्तित कराने समावेदन करने के अधिकार की गारंटी दी जाती है। के लिए उपचार

(2) इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों में से किसी के प्रवर्त्तित

कराने के लिए उच्चतम न्यायालय को ऐसे निर्देश या

आदेश या रिट, जिनके अंतर्गत बन्दी प्रत्यक्षीकरण,

परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार पृच्छा और उत्प्रेषण रिट हैं,

जो भी समुचित हो जारी करने की शक्ति होगी।

(3) संसद विधि द्वारा, किसी अन्य न्यायालय को इस अनुच्छेद

के खंड (2) के अधीन उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रयोक्तव्य

सब या किन्हीं शक्तियों का उसकी अधिकारिता की

स्थानीय सीमाओं के अंदर प्रयोग करने के लिए सशक्त

कर सकेगी।

(4) इस संविधान द्वारा जैसा उपबंधित है, उसके सिवाय, इस

अनुच्छेद द्वारा गारंटी किया गया अधिकार निलम्बित नहीं

किया जाएगा।

इस भाग द्वारा 26. संसद विधि द्वारा अवधारण कर सकेगी कि इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों प्रदत्त अधिकारों में से किसी को, सशस्त्र बलों या लोक का, बलों को व्यवस्था बनाये रखने का भार साधन करने वाले बलों के लागू होने में, सदस्यों को लागू होने में, किसी परिमाण तक निर्बन्धित उपान्तरण, करने या निराकृत किया जाए ताकि उनके कर्तव्यों का उचित की संसद की शक्ति पालन और उनमें अनुशासन बनाए रखना सुनिश्चित रहे।

इस भाग के 27. इस संविधान में अन्यत्र बात के होते हुए भी, संसद की उपबंधों को शक्ति होगी और पहली अनुसूची के भाग-1 या भाग-3 प्रभावी करने के में तत्समय विनिर्दिष्ट राज्य के विधानमंडल को शक्ति लिए उपबंध नहीं होगी कि वह-

(क) उन विषयों में से किसी की बाबत, जो इस भाग के

अधीन संसद द्वारा विधान द्वारा उपबंधित किए जाने

अपेक्षित हैं_ और