अध्याय 1 - कार्यपालिका राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति - Page 135

116 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

* (2) राज्यों में आपस में ऐसी एकरुपता तथा समस्त राज्यों और

संघ में समतुल्यता प्राप्त कराने के लिये संसद और प्रत्येक

राज्य के विधानमंडल का प्रत्येक निर्वाचित सदस्य ऐसे

निर्वाचन में जितने मत देने का हकदार है उनकी संख्या

निम्नलिखित रीति में निर्धारित की जाएगी,

अर्थातः- (क) किसी राज्य के विधानमंडल के प्रत्येक निर्वाचित सदस्य

के उतने मत होंगे जितने कि एक हजार के गुणित उस

भागफल में हों जो राज्य की जनसंख्या को उस विधानमंडल

के निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या से भाग देने पर

आए_

(ख) यदि एक हजार के उक्त गणितों को लेने के बाद शेष

पांच सौ से कम नहीं है तो उपखंड (क) में निर्दिष्ट

प्रत्येक सदस्य के मतों की संख्या में एक और जोड़ दिया

जाएगा_

* . अनुच्छेद 44 के खंड (2) में वर्णित परिकलन की पद्धति का निम्न दृष्टांत दिया जा सकता है-

खंड (2) के उपखंड (क) और (ख) के दृष्टांत-

(1) मुम्बई की जनसंख्या 20,849.840 है। मान लीजिए मुम्बई विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों की कुल

संख्या 208 अर्थात् एक लाख जनसंख्या का प्रतिनिधि का सदस्य है। वह मत संख्या निकालने के

लिए जिसे राष्ट्रपति के निर्वाचन में मत डालने के लिए ऐसा प्रत्येक निर्वाचित सदस्य हकदार होगा,

हमें सबसे पहले 20,849840 को जनसंख्या (208 से) निर्वाचित सदस्यों की संख्या भाग देना होगा,

और फिर भागफल को 1000 से गुणा भाग देना होगा। इस मामले में गुणित 100239 है। इस प्रकार

सदस्य निम्नलिखित मत डाल सकेगा अर्थात् 100,239/1000, 100 (शेष 23) 500 से कम होने के

कारण छोड़ दिए जाएंगे।

(2) पुनः बीकानेर की जनसंख्या 1292,938 है। मान लीजिए बीकानेर के विधानमंडल के निर्वाचित सदस्यों

की कुल संख्या 130 है (अर्थात् एक सदस्य मोटे तौर पर दस हजार जनसंख्या का प्रतिनिधित्व

करता है) अब, उपर्युक्त प्रक्रिया को लागू करके, यदि हम 1292,938 (यानी जनसंख्या) को 130

से (निर्वाचन सदस्य संख्या से) भाग दें तो भागफल होगा 9945। अतः वह मत संख्या निकालने

के लिए जिसे बीकानेर विधानमंडल का प्रत्येक प्रतिनिधि मत डालने के लिए हकदार है इस प्रकार

होगी-9945/1000 = 10 (शेष 945 क्योंकि 500 से अधिक है इसलिए उसे 1000 के समकक्ष मान

लिया गया)।

खंड (2) के उपखंड (ग) के अधीन दृष्टांत - यदि उपरोक्त गणना के अनुसार राज्यों के विधानमंडलों

के सदस्यों के निर्वाचित सदस्यों की प्राप्त कुल मत संख्या 74946 है और संसद के दोनों सदनों के

निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या 750 है तो वह मतसंख्या निकालने के लिए जिसे संसद के प्रत्येक

सदन का प्रत्येक सदस्य राष्ट्रपति के निर्वाचन में मत डाल सकता है, इस प्रकार होगी - 74940-750

इस प्रकार ऐसा प्रत्येक सदस्य जो मत डाल सकेगा उसकी संख्या इस प्रकार होगी- 74940/750=99

23/25 = 100 (23/25 भाग 1/2 से अधिक होने के कारण, 1 गिना गया है।