अध्याय 1 - कार्यपालिका राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति - Page 143

124 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

* (ग) उन सभी ममालों में, जिनमें दंडादेश मृत्यु दंडादेश है।

(2) इस अनुच्छेद के खंड (1) के उपखंड (क) की

कोई बात भारत के सशस्त्र बलों के किसी आफिसर की

सेना न्यायालय द्वारा पारित दंडादेश के निलम्बन, परिहार

या लघुकरण की विधि द्वारा प्रदत्त शक्ति पर प्रभाव

डालेगी।

(3) इस अनुच्छेद के खंड (1) के उपखंड (ग) को कोई

बात तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन किसी राज्य

के राज्यपाल या रियासत के शासक द्वारा प्रयोक्तव्य मृत्यु

दंडादेश के निलम्बर, परिहार या लघुकरण की शक्ति पर

प्रभाव नहीं डालेगी।

संघ की 60. (1) इस संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए, संघ की कार्यपालिका कार्यपालिका शक्ति का विस्तार - शक्ति का विस्तार (क) जिन विषयों के संबंध में संसद को विधि बनाने की शक्ति

है उन तक, और

(ख) किसी संधि या करार के आधार पर भारत सरकार द्वारा

प्रयोक्तव्य अधिकारों, प्राधिकार और अधिकारिता के

प्रयोग तक होगा_

परंतु कि इस उपबंध के उप-अनुबंध (क) में संदर्भित

कार्यपालक शक्ति का, जब तक इस संविधान अथवा

संसद द्वारा निर्मित किसी विधि में जब तक स्पष्ट रुप से

प्रावधान न किया गया हो, किसी भी राज्य के उन मामलों

के संबंध में जिन पर राज्य के विधानमंडल को भी विधि

बनाने का अधिकार है, विस्तार होगा।

(2) जब तक संसद अन्यथा उपबंध न करें तब तक इस

अनुच्छेद में किसी बात के होते हुए भी, कोई राज्य और

राज्य का कोई अधिकारी या प्राधिकारी उन

* . समिति की राय है कि राष्ट्रपति को, राज्यपाल या शासक की शक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना,

किसी भी राज्य में पारित मनुष्य दंडादेश को निलम्बन, परिहार या लघुंकरण करने की शक्ति होनी

चाहिए। परन्तु इस संविधान में या संसद द्वारा बनाई गई विधि में अभिव्यक्त रूप से यथाउपबंधित के

सिवाय, उप-खंड (क) में निर्दिष्ट कार्यपालिका शक्ति का विस्तार किसी राज्य में ऐसे विषयों तक

नहीं होगा जिनके संबंध में उस राज्य के विधानमंडल को भी विधि बनाने की शक्ति है।