125
विषयों में, जिनके संबंध में संसद को उस राज्य के लिये
विधि बनाने की शक्ति है, ऐसी कार्यपालिका शक्ति का
या कृत्यों का प्रयोग कर सकेगा जिनका प्रयोग वह राज्य
या उसका अधिकारी या प्राधिकारी इस संविधान के प्रारंभ
से ठीक पहले कर सकता था।
मंत्रि परिषद
राष्ट्रपति को 61. (1) राष्ट्रपति को उसके कृत्यों के पालन में सहायता और सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका सलाह देने के प्रधान प्रधानमंत्री होगा।
लिए मंत्रिपरिषद् (2) इस प्रश्न की किसी न्यायालय में जांच नहीं की जाएगी
कि क्या मंत्रियों ने राष्ट्रपति को कोई सलाह दी और यदि
दी तो क्या दी।
मंत्रियों के बारे 62. (1) प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करेगा और अन्य मंत्रियों में अन्य उपबंध की नियुक्ति राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की सलाह पर करेगा।
(2) मंत्री, राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत अपने पद धारण करेंगे।
(3) मंत्री-परिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रुप से उत्तरदायी
होगी।
(4) किसी मंत्री द्वारा अपना पद ग्रहण करने से पहले,
राष्ट्रपति तीसरी अनुसूची में इस प्रयोजन के लिए दिए
गए प्रारुपों के अनुसार उसको पद की और गोपनीयता
की शपथ दिलवाएगा।
(5) कोई मंत्री, जो निरंतर छह मास की किसी अवधि तक
संसद का सदस्य नहीं है, उस अवधि की समाप्ति पर
मंत्री नहीं रहेगा।
(6) मंत्रियों के वेतन और भत्ते ऐसे होंगे जो संसद, विधि द्वारा,
समय-समय पर अवधारित करती है और जब तक संसद
इस प्रकार अवधारित नहीं करती है तब तक ऐसे होंगे जो
दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं।
* . समिति ने इस परन्तुक को इस दृष्टि से जोड़ा है कि समवर्ती सूची के विषयों की बांबत कार्यपालिका
शक्ति, संविधान में अथवा संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि में अन्यथा यथा उपबंधित के सिवाय,
संबंधित राज्य में निहित होगी।