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(2) लोकसभा, यदि पहले ही विघटित नहीं कर दी जाती है
तो, अपने प्रथम अधिवेशन के नियत तारीख से * पाँच
वर्ष तक बनी रहेगी, इससे अधिक नहीं और पांच वर्ष
की उक्त अवधि की समाप्ति का परिणाम लोकसभा का
विघटन होगाः
परंतु उक्त अवधि को, जब आपात की उद्घोषणा प्रवर्तन
में है, राष्ट्रपति द्वारा, ऐसी अवधि के लिए बढ़ाए जा
सकेगी, जो एक बार में एक वर्ष से अधिक नहीं होगी
और उद्घोषणा के प्रवर्तन में न रह जाने के पश्चात्
उसका विस्तार किसी भी दशा में छह मास की अवधि
से अधिक नहीं होगा।
संसद के सत्र, (1) संसद के सदन हर वर्ष कम से कम दो बार अधिवेशन सत्रावास और के लिए बुलाए जाएंगे, और एक सत्र में उनकी अंतिम विघटन बैठक तथा अगले सत्र में उनकी प्रथम बैठक के लिए
नियत तारीख के बीच छह मास का अंतर नहीं होगा।
(2) इस अनुच्छेद के उपबंधों के अधीन रहते हुए, राष्ट्रपति
समय-समय पर-
(क) संसद के सदनों या किसी सदन को ऐसे समय और स्थान
पर जो वह ठीक समझें, अधिवेशन के लिए आहूँत कर
सकेगा_
(ख) सदनों का सत्रावसान कर सकेगा_
(ग) लोकसभा का विघटन कर सकेगा।
सदनों में 70. (1) राष्ट्रपति, संसद के किसी एक सदन में या एक साथ अभिभाषण का समवेत दोनों सदनों में अभिभाषण कर सकेगा और इस और उनको प्रयोजन के लिए सदस्यों की उपस्थिति की अपेक्षा कर संदेश भेजने का सकेगा।
राष्ट्रपति का (2) राष्ट्रपति, संसद में उस समय लंबित किसी विधेयक के अधिकार संबंध में संदेश या कोई अन्य संदेश, संसद के किसी
* . समिति ने लोकसभा का कार्यकाल ‘‘चार वर्ष’’ के बजाय ‘‘पाँच वर्ष’’ रखा है क्योंकि वह समझती
है कि संसदीय शासन प्रणाली के मंत्री की पदावधि का प्रथम वर्ष आगामी साधारण निर्वाचनों के लिए
तैयारी करने में लग जाएगा, और इस प्रकार कारगर कार्य के लिए केवल दो वर्ष बेचेंगे जो सुनियोजित
प्रशासन के लिए बहुत कम समय होगा।