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कार्य संचालन

सदस्यों में मतदान, 80. (1) इस संविधान में यथा अन्यथा उपबंधित के सिवाय, रिक्तियों के होते प्रत्येक सदन की बैठक में या सदनों की संयुक्त बैठक में हुए भी सदनों की सभी प्रश्नों का अवधारण, अध्यक्ष को अथवा सभापति कार्य करने की या अध्यक्ष के रुप में कार्य करने वाले व्यक्ति को शक्ति और गणपूर्ति छोड़कर और मत देने वाले सदस्यों के बहुमत से किया

जायेगा।

सभापति या अध्यक्ष, अथवा उस रुप में कार्य करने वाला

व्यक्ति प्रथमतः मत नहीं देगा, किंतु मत बराबर होने की

दशा में उसका निर्णायक मत होगा और वह उसका प्रयोग

करेगा।

(2) संसद के किसी सदन की सदस्यता में कोई रिक्ति होने पर

भी, उस सदन को कार्य करने की शक्ति होगी और यदि

बाद में यह पता चले कि कोई व्यक्ति जो ऐसा करने का

हकदार नहीं था, कार्यवाहियों में उपस्थित रहा है या उसने

मत दिया है या अपना भाग लिया है तो भी संसद की

कोई कार्यवाही विधिमान्य होगी।

(3) यदि किसी सदन के अधिवेशन के दौरान किसी समय,

उस सदन की कुल सदस्य संख्या के छटे भाग से कम

उपस्थिति है तो सभापति या अध्यक्ष अथवा इस रुप में

कार्य करने वाले व्यक्ति का कर्तव्य होगा कि वह सदन

को स्थापित करें, अथवा तब अधिवेशन निलंबित करे

जब तक कम से कम सदस्यों का छटा भाग उपस्थित न

हो।

सदस्यों की निरर्हताएं

सदस्यों द्वारा 81. संसद के प्रत्येक सदन का प्रत्येक सदस्य, अपना स्थान घोषणा ग्रहण करने से पूर्व, राष्ट्रपति अथवा उसके द्वारा उस

निमित्त नियुक्त किसी व्यक्ति के समक्ष, तीसरी अनुसूची

में इस प्रयोजन के लिए वर्णित प्रारुप के अनुसार घोषणा

करेगा और उस पर हस्ताक्षर करेगा।