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के बिना या केवल ऐसे संशोधनों सहित जिन पर दोनों
सदन सहमत हो गए हैं, उस पर दोनों सदन सहमत नहीं
हो जाते हैं।
(3) संसद में लम्बित विधेयक सदनों के सत्रावसान के कारण
व्यपगत नहीं होगा।
(4) राज्यसभा में लम्बित विधेयक, जिसको लोकसभा ने
पारित नहीं किया है, लोकसभा के विघटन पर व्यपगत
नहीं होगा।
(5) कोई विधेयक जो लोकसभा में लम्बित है या जो
लोकसभा द्वारा पारित कर दिया गया है और राज्य सभा
में लंबित है, अनुच्छेद 88 के उपबंधों के अधीन रहते
हुए, लोकसभा के विघटन पर व्यपगत हो जाएगा। कुछ दशाओं में 88. (1) यदि किसी विधेयक के एक सदन द्वारा पारित किए जाने दोनों सदनों की और दूसरे सदन को पारेषित किए जाने के पश्चात्- संयुक्त बैठक (क दूसरे सदन द्वारा विधेयक अस्वीकार कर दिया गया है, या
(ख) विधेयक में किए जाने वाले संशोधनों के बारे में दोनों
सदन अंतिम रुप से असहमत हो गए हैं, या
(ग) दूसरे सदन को विधेयक प्राप्त होने की तारीख से उसके
द्वारा विधेयक पारित किए बिना छह मास से अधिक बीत
गए हैं तो उस दशा के सिवाय जिसमें लोकसभा का
विघटन होने के कारण विधेयक व्यपगत हो गया है,
राष्ट्रपति विधेयक पर विचार-विमर्श करने और मत देने
के प्रयोजन के लिये सदनों को संयुक्त बैठक में अधिवेशित
होने के लिए आहूत करने के अपने आशय की
सूचना, यदि वे बैठक में है तो संदेश द्वारा या यदि वे
बैठक में नहीं है तो लोक अधिसूचना द्वारा देगा।
परंतु इस खंड की कोई बात धन विधेयक को लागू नहीं
होगी।
(2) 6 मास की ऐसी अवधि की गणना करने में जो इस
अनुच्छेद के खंड (1) में निर्दिष्ट है, किसी ऐसी अवधि
को हिसाब में नहीं लिया जाएगा जिसके दौरान सदन
निरंतर चार से अधिक दिनों के लिए सत्रावसित या
स्थगित कर दिया जाता है।