अध्याय 3 - राष्ट्रपति की विधायी शक्तियाँ - Page 168

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अध्याय 3

राष्ट्रपति की विधायी शक्तियाँ

संसद के 102. (1) उस समय को छोड़कर जब संसद के दोनों सदन सत्र में विश्रांतिकाल है, यदि किसी समय राष्ट्रपति का यह समाधान हो जाता में अध्यादेश है कि ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हैं जिनके कारण तुरंत प्रख्यापित करने कार्रवाई करना उसके लिए आवश्यक हो गया है तो वह की राष्ट्रपति ऐसे अध्यादेश प्रख्यापित कर सकेगा जो उसे उन परिस्थितियों की शक्ति में अपेक्षित प्रतीत हों।

(2) इस अनुच्छेद के अधीन प्रख्यापित अध्यादेश का वही

बल और प्रभाव होगा जो संसद के अधिनियम का होता

है, किंतु प्रत्येक ऐसा अध्यादेश-

(क) संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखा जाएगा और संसद के

पुनः समवेत होने से छह सप्ताह की समाप्ति पर या यदि

उस अवधि की समाप्ति से पहले दोनों सदन उसके

अनुमोदन का संकल्प पारित कर देते हैं, तो इनमें से दूसरे

संकल्प के पारित होने पर प्रवर्तन में नहीं रहेगा_

और

(ख) राष्ट्रपति द्वारा किसी भी समय वापस लिया जा

सकेगा।

स्पष्टीकरण- जहां संसद के सदन, भिन्न-भिन्न तारीखों

को पुनः समवेत होने के लिए, आहूँत किए जाते हैं वहां

इस खंड के प्रयोजनों के लिए, छह सप्ताह की अवधि

की गणना उन तारीखों में से पश्चात्वर्ती तारीख से की

जाएगी।

(3) यदि और जहां तक इस अनुच्छेद के अधीन अध्यादेश

कोई ऐसा उपबंध करता है जिसे अधिनियमित करने के

लिए संसद इस संविधान के अधीन सक्षम नहीं है तो और

वहां तक वह अध्यादेश शून्य होगा।