अध्याय-4 - संघ की न्यायपालिका - Page 174

155

(3) जहां ऐसा प्रमाण-पत्र अथवा ऐसी इजाजत दे दी गई हो

वहां मामले में कोई पक्ष ऐसे किसी पूर्वोक्त प्रश्न के

अशुद्ध निर्णय हो जाने के आधार पर ही नहीं बल्कि

किसी अन्य आधार पर भी उच्चतम न्यायालय में अपील

कर सकेगा।

स्पष्टीकरण- इस अनुच्छेद के प्रयोजनों के लिए ‘‘अंतिम’’

आदेश पद के अंतर्गत ऐसे विवादक का विनिश्चय करने

वाला आदेश है, जो यदि अपीलार्थी के पक्ष में विनिश्चित

किया जाता है तो, उस मामले में अंतिम निपटारे के लिए

पर्याप्त होगा।

अन्य मामलों 111. (1) पहली अनुसूची के भाग 3 में तत्समय विनिर्दिष्ट राज्यों में पहली अनुसूची के सिवाय भारत के राज्यक्षेत्र में किसी उच्च न्यायालय के भाग 3 में की सिविल कार्यवाही में किसी निर्णय, डिक्री या अंतिम तत्समय विनिर्दिष्ट आदेश की अपील उच्चतम न्यायालय में होगी यदि उच्च राज्यों के सिवाय न्यायालय प्रमाणित कर देता है कि- भारत के राज्यक्षेत्र (क) विवाद की राशि या मूल्य प्रथम बार के न्यायालय में और में उच्च न्यायालयों अपीलगत में भी बीस हजार रुपए से कम नहीं है_ से अपीलों में अथवा

उच्चतम न्यायालय (ख) निर्णय, डिक्री या अंतिम आदेश में उतनी राशि या मूल्य की अपीली की संपत्ति से सम्बद्ध कोई दावा या प्रश्न प्रत्यक्ष या परोक्ष अधिकारित ा रुप में, अंतर्ग्रस्त है_ अथवा

(ग) मामला उच्चतम न्यायालय में अपील किए जाने योग्य है,

तथा जहां की अपीलकृत निर्णय डिक्री या अंतिम आदेश

खंड (ग) में निर्दिष्ट मामले से भिन्न किसी मामले में

ठीक निचले न्यायालय के विनिश्चय की पुष्टि करता है

वहां यदि उच्च न्यायालय यह भी प्रमाणित करे कि

अपील में कोई सारवान विधि प्रश्न अंतर्वलित है।

(2) इस संविधान के अनुच्छेद 110 में अन्तर्विष्ट किसी बात

के होते हुए भी, इस अनुच्छेद के खंड (1) के अधीन

उच्चतम न्यायालय में अपील करने वाला कोई भी

पक्षकार ऐसी अपील में आधारों में से एक आधार यह ले

सकता है कि मामले में संविधान में निर्वचन के बारे में