अध्याय-4 - संघ की न्यायपालिका - Page 175

156 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

सारवान विधि-प्रश्न अन्तर्वलित है जिसका विनिश्चय

गलत किया गया है।

कुछ अन्य मामलों 112. उच्चतम न्यायालय, उन मामलों में जिनमें इस संविधान के में अपील के अनुच्छेद 110 या अनुच्छेद 111 के उपबंध लागू नहीं लिए उच्चतम होते हैं, पहली अनुसूची के भाग 3 तत्समय विनिर्दिष्ट न्यायालय की राज्यों के सिवाय, भारत के राज्यक्षेत्र में किसी न्यायालय विशेष इजाजत या अधिकरण द्वारा पारित या किए गए, किसी मुकदमे या

मामले में किसी निर्णय, डिक्री या अंतिम आदेश के

विरुद्ध अपील के लिए विशेष इजाजत दे सकेगा।

कुछ मामलों में, 113. (1) यदि पहली अनुसूची के भाग-3 में तत्समय विनिर्दिष्ट पहली अनुसूची किसी राज्य में उच्च न्यायालय में किसी सिविल, दांडिक के भाग 3 में या अन्य कार्यवाही के अनुक्रम में संसद या ऐसे राज्य से तत्समय विनिर्दिष्ट भिन्न किसी राज्य के विधानमंडल की विधि के लागू राज्यों में उच्च होने या निर्वचन के बारे में कोई प्रश्न उत्पन्न होता है तो, न्यायालयों द्वारा उच्च न्यायालय, या तो स्वप्रेरणा से या कोई से भी उच्चतम न्यायालय पक्षकार के आवेदन पर, मामले का विवरण, अपनी राय को निर्देश के साथ ऐसे प्रश्न के निर्देश-विशेष के साथ तैयार कर

सकेगा और ऐसा प्रश्न उच्चतम न्यायालय को उसकी राय

के लिए निर्दिष्ट कर सकेगा।

(2) उच्चतम न्यायालय, जहां ऐसा कोई उच्च न्यायालय इस

अनुच्छेद के खंड (1) के अधीन मामले को निर्दिष्ट

करने से इंकार कर देता है वहां, मामले को इस प्रकार

निर्दिष्ट किए जाने की अपेक्षा कर सकेगा।

(3) जब कोई मामला इस अनुच्छेद के खंड (1) के अधीन

या खंड (2) के अधीन इस प्रकार निर्दिष्ट किया जाए

तो उच्च न्यायालय तब तक सारी कार्यवाहियां रोक देगा,

जब तक कि उच्चतम न्यायालय की राय प्राप्त न हो

जाए।

(4) उच्चतम न्यायालय, पक्षकारों को सुनवाई का अवसर दिए

जाने के बाद, इस प्रकार निर्दिष्ट प्रश्न का विनिश्चय

करेगा, और अपनी राय की प्रतिलिपि उच्च न्यायालय को

भिजवाएगा और इस प्रकार उच्च न्यायालय, उसे प्राप्त