अध्याय-4 - संघ की न्यायपालिका - Page 176

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करने पर, उच्चतम न्यायालय की राय के अनुरुप मामले

का निपटारा करने के लिए अग्रसर होगा।

(5) उच्चतम न्यायालय, इस अनुच्छेद के अंतर्गत निर्दिष्ट

किसी मामले को, किसी भी प्रक्रम पर, वापस भेज

सकेगा ताकि उसमें और अधिक तथ्यों का उल्लेख किया

जा सके।

उच्चतम न्यायालय 114. (1) उच्चतम न्यायालय को संघ सूची के विषयों में से किसी की अधिकारिता के संबंध में ऐसी अतिरिक्त अधिकारिता और शक्तियां की वृद्धि होगी जो संसद विधि द्वारा प्रदान करे।

(2) यदि संसद विधि द्वारा उच्चतम न्यायालय द्वारा ऐसी

अधिकारिता और शक्तियों के प्रयोग का उपबंध करती है

तो उच्चतम न्यायालय को किसी विषय के संबंध में ऐसी

अतिरिक्त अधिकारिता और शक्तियां होंगी जो भारत

सरकार और किसी राज्य की सरकार विशेष करार द्वारा

प्रदान करें।

कुछ रिट निकालने 115. संसद विधि द्वारा उच्चतम न्यायालय को अनुच्छेद 25 की शक्तियों का के खंड (2) में वर्णित प्रयोजनों से भिन्न किन्हीं प्रयोजनों उच्चतम न्यायालय के लिए ऐसे निर्देश, आदेश या रिट जो बंदी प्रत्यक्षीकरण, को प्रदत्त परमादेश, प्रतिषेध, अधिकारपृच्छा और उत्प्रेषण रिट की किया जाना प्रकृति के हों, या उनमें से कोई निकालने की शक्ति प्रदान

कर सकेगी।

उच्चतम न्यायालय 116. संसद, विधि द्वारा, उच्चतम न्यायालय को ऐसी अनुपूरक की आनुषंगिक शक्तियां प्रदान करने के लिए उपबंध कर सकेगी जो इस शक्तियां संविधान के उपबंधों में से किसी से असंगत न हो और

जो उस न्यायालय को इस संविधान द्वारा या इसके अधीन

प्रदत्त अधिकारिता का अधिक प्रभावी रुप से प्रयोग

करने के योग्य बनाने के लिए आवश्यक या वांछनीय

प्रतीत हो।

उच्चतम न्यायालय 117. उच्चतम न्यायालय द्वारा घोषित विधि भारत के राज्यक्षेत्र द्वारा घोषित विधि के भीतर सभी न्यायालयों पर आबद्धकर होगी। का सभी न्यायालयों

पर आबद्धकर होना