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सिविल और 120. भारत के राज्यक्षेत्र के सभी सिविल और न्यायिक प्राधिकार न्यायिक प्राधिकारियों उच्चतम न्यायालय की सहायता में कार्य करेंगे। प्राधिकारियों द्वारा
उच्चतम न्यायालय
की सहायता में
कार्य किया जाना
* न्यायालय 121. (1) संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन के नियम आदि रहते हुए, उच्चतम न्यायालय समय-समय पर राष्ट्रपति
के अनुमोदन से न्यायालय की पद्धति और प्रक्रिया को
साधारणतया, विनियमन के लिए नियम बना सकेगा
जिसके अंतर्गत निम्नलिखित भी हैं, अर्थात्ः
उस न्यायालय में विधि व्यवसाय करने वाले व्यक्ति के
बारे में नियमः
(क) अपीलें सुनने की प्रक्रिया के बारे में और अपीलों संबंधी
अन्य विषयों के बारे में,
(ख) जिनके अंतर्गत वह समय भी है जिसके भीतर अपीलें
उस न्यायालय में ग्रहण की जानी है, और उनकी बाबत
अपने निवेदन के लिए न्यायालय के समक्ष हाजिर होने
वाले अधिवक्ताओं को दिए जाने वाले समय के बारे में
नियम_
* . संयुक्त राज्य अमेरिका के उच्चतम न्यायालय में न्यायालय के सब न्यायाधीश प्रत्येक मामले की
सुनवाई में भाग लेने के हकदार होते हैं, और न्यायालय कभी भी खंड में पीठासीन नहीं होता। उस
न्यायालय के न्यायाधीश इस पद्धति को सबसे अधिक महत्व देते हैं। समिति की राय है कि भारत में
इस प्रक्रिया का अनुसरण कम-से-कम दो प्रकार के मामलों में किया जाए अर्थात् वे जिनमें संविधान
के निर्वाचन का प्रश्न अन्तर्वलित है और वे जो राष्ट्रपति द्वारा उच्चतम न्यायालय को उसकी राय के
लिए निर्देशित किए जाते हैं। वही पद्धति अन्य प्रकार के मामलों में भी लागू की जाए या नहीं जिसे
संसद विधि द्वारा विनियमित कर सकेगी।
मद (ख) भी जो अधिवक्ताओं को न्यायालय के समक्ष अपने निवेदन करने के लिए समय दिए जाने
को विनियमित करने के लिए नियम बनाने की शक्ति देती है, इस अनुच्छेद में अंतःस्थापित की गई
है। यह संयुक्त अमेरिका के उच्चतम न्यायालय में प्रचलित पद्धति के अनुसरण में है। वहां अधि
वक्ताओं को अपने पक्ष पर बहस करने के लिए सामान्यतः केवल एक घंटा दिया जाता है, उनके
शेष निवेदन लिखित होते है। (समिति के एक सदस्य श्री अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर के विचार में
इस शक्ति को इस अनुच्छेद में व्यक्त उल्लेख आवश्यक है क्योंकि उनकी राय में, उसके साधारण
अपीलों, कृत्यों की बाबत, भारत में उच्चतम न्यायालय की स्थिति अमेरिका के उच्चतम न्यायालय
की स्थिति से भिन्न है।