अध्याय 1-साधरण एवं अध्याय-2 कार्यपालिका - Page 184

165

अनुकल्पतः

* राज्यपाल 131. राज्य का राज्यपाल राष्ट्रपति द्वारा चार अभ्यर्थियों के एक की नियुक्ति पैनल में से जिसका चुनाव राज्य की विधानसभा के

सदस्यों द्वारा किया जाएगा, अथवा जहां राज्य में विधान

परिषद हैं वहां राज्य की विधानसभा और विधानपरिषद

दोनों की संयुक्त बैठक में समवेत सभी सदस्यों द्वारा,

एकल अंतरणीय मत के माध्यम से आनुपातिक प्रतिनिधित्व

की प्रणाली के अनुसार होगा और ऐसे निर्वाचन में मतदान

गुप्त मतपत्र द्वारा किया जाएगा।

राज्यपाल की 132. राज्यपाल उस तारीख से जिसको वह अपना पद ग्रहण पदावधि करता है ** पांच वर्ष की पदावधि के लिए पद धारण

करेगाः

परंतु-

(क) राज्यपाल, राज्य की विधानसभा के अध्यक्ष को अथवा

जहां राज्य के विधानमंडल के दो सदन हैं, विधानसभा के

अध्यक्ष को और विधानपरिषद के सभापति को संबोधित

करके, अपने हस्ताक्षर से त्यागपत्र देकर अपना पद त्याग

सकेगा_

(ख) राज्यपाल को संविधान के उल्लंघन के कारण, *** इस

संविधान के अनुच्छेद 137 में उपबंधित रीति से महाभियोग

द्वारा पद से हटाया जा सकेगा।

(ग) राज्यपाल अपनी पदावधि समाप्त हो जाने के बावजूद

अपना पद तब तक धारण किए रहेगा जब तक उसका

उत्तराधिकारी अपना पद ग्रहण न करे।

* . समिति के कुछ सदस्य दृढ़तापूर्वक इस अनुकल्प के पक्ष में हैं, क्योंकि उनका विचार है कि लोगों

द्वार निर्वाचित राज्यपाल और विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी प्रधानमंत्री के सह-अस्तित्व से मनमुटाव

तथा परिणामस्वरूप प्रशासन में कमजोरी आ सकती है।

∗∗ समिति की राय है कि राज्यपाल की पदावधि विधानसभा के कार्यकाल में चार वर्ष के स्थान पर

पाँच वर्ष के समिति द्वारा सुझाए गए परिवर्तन की दृष्टि से चार वर्ष के स्थान पर पाँच वर्ष होनी

चाहिए।

∗∗∗ समिति की राय है कि राज्यपाल पर संविधान के अतिक्रमण के कारण ही महाभियोग चलाया जाना

चाहिए जैसा कि राष्ट्रपति की स्थिति में होता है, न कि किसी दुर्व्यवहार के कारण।