168 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
प्रत्येक राज्यपाल 136. प्रत्येक राज्यपाल और प्रत्येक व्यक्ति जो राज्यपाल के और प्रत्येक व्यक्ति कृत्यों का निर्वहन कर रहा है, अपना पद ग्रहण करने से द्वारा जो राज्यपाल पहले उस राज्य के विधानमंडल के सदस्यों के समक्ष के कृत्यों का निम्नलिखित प्रारुप में शपथ लेगा या प्रतिज्ञान करेगा और निर्वहन करता रहा है, उस पर अपने हस्ताक्षर करेगा, अर्थात्ः-
अपना पद ग्रहण करने ‘‘मैं अमुक (नाम...) ईश्वर की शपथ लेता हूँं सत्यनिष्ठा से पहले, शपथ या से प्रतिज्ञान करता हूँ कि मैं श्रद्धापूर्वक (राज्य का नाम) प्रतिज्ञान ................... के राज्यपाल के पद का कार्यपालन
(अथवा राज्यपाल के कृत्यों का निर्वहन) करुँगा तथा
अपनी पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परीक्षण,
संरक्षण और प्रतिरक्षण करुंगा और मैं..... (नाम) (राज्य
का नाम) की जनता की सेवा और कल्याण में समर्पित
रहूँगा।
* राज्यपाल के 137. (1) जब राज्यपाल पर महाभियोग चलाया जाना हो तो आरोप महाभियोग राज्य की विधानसभा द्वारा लाया जाएगा। की प्रक्रिया (2) ऐसा कोई आरोप तब तक नहीं लाया जाएगा जब
तक कि-
(क) ऐसा आरोप लाने का प्रस्ताव एक संकल्प में अंतर्विष्ट न
हो जो विधानसभा के कम से कम 30 सदस्यों द्वारा
हस्ताक्षरित संकल्प पेश करने के उनके आशय की
लिखित सूचना दिए जाने के बाद पेश किया गया हो, और
(ख) संकल्प विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के कम से
कम दो तिहाई सदस्यों द्वारा समर्थित न हो।
(3) आरोप के इस प्रकार लाये जाने के पश्चात् विधानसभा
का अध्यक्ष राज्यसभा के सभापति को सूचित करेगा और
उस पर राज्यसभा आरोप के बारे में अन्वेषण करने के
लिए एक समिति नियुक्त करेगी जिसमें वे सदस्य शामिल
हो सकते हैं जो राज्यसभा के सदस्य नहीं हैं, तथा
* . यदि अनुच्छेद 131 में दूसरा विकल्प अपना लिया जाता है तो इस अनुच्छेद में ‘निर्वाचित’ शब्द के
स्थान पर ‘नियुक्ति’’ शब्द प्रयुक्त करना होगा।