176 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
परंतु किसी राज्य के विधानमंडल में कुल सदस्य संख्या किसी भी दशा में तीन सौ से अधिक या साठ से कम नहीं होगी।
(4) प्रत्येक जनगणना पूरी होने पर, प्रत्येक राज्य की विधानसभा में विभिन्न क्षेत्रीय निर्वाचन-क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व, संविधान के अनुच्छेद 289 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, ऐसे प्राधिकारी द्वारा, ऐसी रीति से, और ऐसी तारीख से जो राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा अवधारित करे पुनः समायोजित किया जाएगाः
परंतु ऐसे पुनः समायोजन से विधान सभा के प्रतिनिधित्व पर प्रभाव नहीं पड़ेगा जब तक कि उस समय विद्यमान विधानसभा का विघटन न हो जाए।
विधान परिषदों 150. (1) किसी राज्य की विधान परिषद में जहां ऐसी परिषद हो, की संरचना कुल सदस्य उस राज्य की विधानसभा में कुल सदस्य संख्या के 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।
(2) किसी राज्य की विधान परिषद में सदस्यों की कुल संख्या में से-
(क) आधे सदस्य इस अनुच्छेद के खंड (3) के अधीन गठित अभ्यर्थियों के पैनल में से चुने जाएंगे_
(ख) एक तिहाई सदस्य एकल अंतरणीय मत के माध्यम से आनुपातिक प्रतिनिधित्व की प्रणाली के अनुसार राज्य की विधानसभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित किए जाएंगे_ और
(ग) शेष सदस्य राज्यपाल द्वारा नामनिर्देशित किए जाएंगे।
(3) प्रथम साधारण निर्वाचनों से पहले और तत्पश्चात् राज्य की विधान परिषद के इस संविधान के अनुच्छेद 151 के खंड (2) के अधीन प्रत्येक ट्रेनियल निर्वाचन से पहले अभ्यर्थियों के पांच पैनल बनाए जाएंगे जिनमें से एक में राज्य के विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों के नाम होंगे और शेष चार में उन व्यक्तियों के नाम होंगे जो निम्नलिखित विषयों में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखते हैं, अर्थात्-