अध्याय 3 - राज्य विधानमंडल - Page 198

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* प्रत्येक सत्र 155. (1) राज्यपाल प्रत्येक सत्र के आरंभ में विधानसभा में या के आरंभ में विधान परिषद वाले राज्य की दशा में एक साथ समवेत राज्यपाल का दोनों सदनों में अभिभाषण करेगा और विधानमंडल को विशेष अभिभाषण उसके आह्वान के कारण बताएगा। और अभिभाषण (2) ऐसे अभिभाषण में निर्दिष्ट विषयों की चर्चा की समय-समय में निर्दिष्ट विषयों नियत करने के लिए तथा सदन के अन्य कार्य पर ऐसी की विधानमंडल चर्चा की अधिमानता के लिए प्रत्येक सदन की प्रक्रिया में चर्चा का विनियमन करने वाले नियमों द्वारा उपबंध किया

जाएगा।

सदनों के बारे 156. प्रत्येक मंत्री और राज्य के महाधिवक्ता को यह अधिकार में मंत्रियों और होगा कि वह उस राज्य की विधानसभा में या विधान महाधिवक्ता परिषद वाले राज्य की दशा में दोनों सदनों में बोले और के अधिकार उनकी कार्यवाहियों में अन्यथा भाग ले और विधानमंडल

की किसी समिति में, जिसमें उसका नाम सदस्य के रुप

में दिया गया है, बोले और उसकी कार्यवाहियों में अन्यथा

भाग ले, किन्तु इस अनुच्छेद के आधार पर वह मत देने

का हकदार नहीं होगा।

राज्य के विधानमंडल के अधिकारी

विधान सभा 157. प्रत्येक राज्य की विधानसभा, यथाशक्य शीघ्र, अपने दो का अध्यक्ष सदस्यों को अपना अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनेगी और और उपाध्यक्ष जब-जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का पद रिक्त होता है

तब-तब विधानसभा किसी अन्य सदस्य को, यथास्थिति

अध्यक्ष या उपाध्यक्ष चुनेगी।

अध्यक्ष और 158. विधान सभा के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के रुप में पद उपाध्यक्ष का धारण करने वाला सदस्य

पद रिक्त होना, (क) यदि विधानसभा का सदस्य नहीं रहता है तो अपना पद पद त्याग और रिक्त कर देगा_

पद से हटाया जाना (ख) किसी भी समय, यदि वह सदस्य अध्यक्ष है तो उपाध्यक्ष

को संबोधित और यदि वह सदस्य उपाध्यक्ष है तो अध्यक्ष

को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद

* . यह खंड यूनाइटेड किंगडम को संसद में प्रचलित परिपाटी पर आधारित है, समिति ने इसे इसलिए

जोड़ा है क्योंकि उसका विचार है कि यह हमारे संविधान में भी उपयोगी सिद्ध होगा।