अध्याय 3 - राज्य विधानमंडल - Page 201

182 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

अध्यक्ष या सभापति, अथवा उस रुप में कार्य करने वाला

व्यक्ति प्रथमतः मत नहीं देगा, किंतु मत बराबर होने की

दशा में उसका निर्णायक मत होगा और वह उसका प्रयोग

करेगा।

(2) राज्य के विधानमंडल के किसी सदन की सदस्यता में

कोई रिक्ति होने पर भी, उस सदन को कार्य करने की

शक्ति होगी और यदि बाद में यह पता चलता है कि कोई

व्यक्ति, जो ऐसा करने का हकदार नहीं था, कार्यवाहियों

में उपस्थित रहा है या उसने मत दिया है अन्यथा भाग

लिया है तो भी राज्य के विधानमंडल की कार्यवाही

विधिमान्य होगी।

(3) यदि राज्य की विधानसभा या विधान परिषद की बैठक

के दौरान किसी समय विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे

तब तक गणपूर्ति नहीं है तो अध्यक्ष या सभापति या उस

रुप में कार्य करने वाले व्यक्ति का कर्तव्य होगा कि वह

सदन को स्थापित कर दे या उस अधिवेशन को तब तक

निलम्बित कर दे जब तक गणपूर्ति न हो। गणपूर्ति सदन

के कुल सदस्य संख्या में से दस सदस्य या 1/6 भाग,

इसमें से जो भी अधिक हो, होगी।

सदस्यों की निरर्हताएं

सदस्यों द्वारा 165. राज्यों की विधानसभा या विधान परिषद का प्रत्येक घोषणाएं सदस्य, अपना स्थान ग्रहण करने से पहले, राज्यपाल के

समक्ष या उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी व्यक्ति

के समक्ष तीसरी अनुसूची में इस प्रयोजन के लिए दिए

गए प्रारुप के अनुसार घोषणा करेगा और उस पर अपने

हस्ताक्षर करेगा।

स्थानों का 166. (1) कोई व्यक्ति राज्य के विधानमंडल के दोनों सदनों का रिक्त होना सदस्य नहीं होगा और जो व्यक्ति दोनों सदनों का सदस्य

चुन लिया जाता है उसके एक या दूसरे सदन के स्थान

को रिक्त करने के लिए उस राज्य का विधानमंडल विधि

द्वारा उपबंध करेगा।