अध्याय 3 - राज्य विधानमंडल - Page 202

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(2) कोई व्यक्ति संसद और किसी राज्य के विधानमंडल दोनों का सदस्य नहीं होगा और यदि कोई व्यक्ति संसद और राज्य के विधानमंडल का सदस्य चुन लिया जाता है तो ऐसी अवधि के बीतने पर जो उस राज्य के राज्यपाल द्वारा बनाए गए नियमों में विनिर्दिष्ट की जाए, राज्य के विधानमंडल में उस व्यक्ति का स्थान रिक्त हो जाएगा जब तक कि उसने इससे पहले संसद में अपना स्थान न त्याग दिया हो।

(3) यदि राज्य के विधानमंडल के किसी सदन का

सदस्य-

(क) अगले अनुच्छेद के खंड (1) में वर्णित किसी निरर्हता से ग्रस्त हो जाता है, या

(ख) यथास्थिति अध्यक्ष या सभापति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपने स्थान का त्याग कर देता है और उसका त्यागपत्र यथास्थिति, अध्यक्ष या सभापति द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है तो ऐसा होने पर उसका स्थान रिक्त हो जाएगाः

(4) यदि किसी राज्य के विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य साठ दिन की अवधि तक सदन की अनुज्ञा के बिना उसके सभी अधिवेशनों से अनुपस्थित रहता है तो सदन उसके स्थान को रिक्त घोषित कर सकेगाः परंतु साठ दिन की उक्त अवधि की संगणना करने में किसी ऐसी अवधि को हिसाब में नहीं लिया जाएगा जिसके दौरान सदन सत्रावसित या निरंतर चार से अधिक दिनों के लिए स्थगित रहता है।

सदस्यता के 167. (1) कोई व्यक्ति किसी राज्य की विधानसभा या विधान लिए निरर्हताएं परिषद का सदस्य चुने जाने के लिए और सदस्य होने के लिए निरर्हित होगा-

(क) यदि वह भारत सरकार के या पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट किसी राज्य की सरकार के अधीन, ऐसे पद को छोड़कर जिसके धारण करने वाले का निरर्हित न होना राज्य के विधानमंडल ने विधि द्वारा घोषित किया है, कोई लाभ का पद धारण करता है_