अध्याय 3 - राज्य विधानमंडल - Page 206

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वाले राज्यों में को प्रेषित किए जाने के पश्चात्, विधेयक के दोनों सदनों दोनों सदनों की द्वारा पारित किए बिना परिषद द्वारा विधेयक की प्राप्ति संयुक्त बैठक की तारीख से 6 मास से अधिक बीत जाते हैं तो राज्यपाल, जब तक कि विधेयक विधानसभा के विघटन के कारण व्यपगत नहीं हो गया है, विधेयक पर विचार-विमर्श और मतदान करने के प्रयोजनों के लिए संयुक्त बैठक में अधिवेशन करने के लिए सदनों को आहूँत कर सकेगाः

परंतु यह स्थिति धन विधेयक पर लागू नहीं होगी।

(2) छह मास की ऐसी कोई अवधि निकालने के लिए जो इस अनुच्छेद के खंड (1) में निर्दिष्ट है, उस समय को हिसाब में नहीं लिया जाएगा जिसके दौरान सदन चार दिन से अधिक दिन सत्रावसान में रहे हैं।

(3) यदि इस अनुच्छेद के उपबंधों के अनुसार आहूँत दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में, विधेयक ऐसे संशोधनों सहित यदि कोई हैं, जिन पर संयुक्त बैठक में सहमति है, दोनों सदनों के उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों की कुल संख्या के बहुमत द्वारा पारित कर दिया जाता है तो इस संविधान के प्रयोजनों के लिए यह समझा जाएगा कि वह दोनों सदनों द्वारा पारित कर दिया गया हैः

परंतु संयुक्त बैठक में-

(क) यदि विधेयक विधान परिषद द्वारा संशोधनों सहित पारित नहीं किया गया है और विधानसभा को लौटा दिया गया है, ऐसे संशोधनों से भिन्न (यदि कोई है) कोई संशोधन विधेयक में प्रस्तावित नहीं किए जाएंगे जो विधेयक के पारित किए जाने में विलम्ब के कारण आवश्यक हो गए हैं।

(ख) यदि विधेयक विधान परिषद द्वारा पारित करके लौटा दिया गया है तो यथा पूर्वोक्त केवल ऐसे संशोधन विधेयक में प्रस्तावित किए जाएंगे और अन्य ऐसे संशोधन जो उन विषयों की बाबत सुसंगत है_ जिनके संबंध में सदन