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की परिभाषा विधेयक समझा जाएगा यदि उसमें केवल निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों से संबंधित उपबंध हैं,
अर्थात्ः
(क) किसी कर का अधिरोपण, उत्पादन, परिहार, परिवर्तन या विनियमन_
(ख) राज्य द्वारा धन उधार लेने का या कोई प्रत्याभूति देने का विनियमन अथवा राज्य द्वारा अपने ऊपर ली जाने वाली किन्हीं वित्तीय बाध्यताओं से संबंधित विधि का
संशोधन_
(ग) प्रदाय_
(घ) राज्य के राजस्व का विनियोग_
(ड.) किसी भी व्यय का राज्य के राजस्व पर भारित व्यय घोषित किया जाना, अथवा ऐसी किसी व्यय की राशि का बढ़ाया जाना_
(च) राज्य की संचित निधि या राज्य के लोक लेखे मुद्दे धन प्राप्त करना अथवा ऐसे धन की अभिरक्षा या उसका निर्गमन_ या
(छ) उपखंड (क) से उपखंड (छ) में विनिर्दिष्ट किसी विषय का आनुषंगिक कोई विषय। (2) कोई विधेयक केवल इस कारण धन विधेयक नहीं समझा जाएगा, कि वह जुर्मानों या अन्य धनीय शास्तियों के अधिरोपण का अथवा अनुज्ञप्तियों के लिए फीसों की या की गई सेवाओं के लिए फीसों की मांग का या उनके संदाय का उपबंध करता है अथवा इस कारण धन विधेयक नहीं समझा जाएगा कि वह किसी स्थानीय प्राधिकारी या निकाय द्वारा स्थानीय प्रयोजनों के लिए किसी कर के अधिरोपण, उत्पादन, परिहार, परिवर्तन या विनियमन का उपबंध करता है।
(3) यदि यह प्रश्न उठता है कि विधान परिषद वाले किसी राज्य के विधानमंडल में पुरःस्थापित कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं है तो उस पर उस राज्य की विधानसभा के अध्यक्ष का विनिश्चय अंतिम होगा।