1. लक्ष्य और उद्देश्य संबंधी संकल्प - Page 21

2 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

तारीख 13 दिसम्बर, 1946 को माननीय पंडित जवाहरलाल नेहरु ने निम्नलिखित लक्ष्यों और उद्देश्यों विषयक संकल्प पेश कियाः-

1 यह संविधान सभा भारत को एक स्वाधीन प्रभुतासंपन्न गणराज्य उद्घोषित करने का दृढ़ संकल्प लेकर घोषणा करता है और भावी शासन के लिए संविधान बनाता है।

  1. जिसमें उन राज्यक्षेत्रों से मिलकर जो ब्रिटिश भारत में है, वे राज्यक्षेत्र, जो देशी

रियासतों के अंग हैं, और भारत के अन्य ऐसे भाग जो ब्रिटिश भारत से बाहर

हैं तथा राज्य एवं अन्य ऐसे राज्यक्षेत्र जो स्वाधीन संप्रभु भारत में शामिल होने

के इच्छुक हैं, एक संघ बनेगा_ तथा

  1. जिसमें उक्त राज्यक्षेत्र चाहे अपनी वर्तमान सीमा-रेखाओं के साथ या ऐसी

सीमा-रेखाओं के साथ जो संविधान सभा द्वारा और तत्पश्चात् संविधान के

अनुसार तय की जाएं, अवशिष्ट शक्तियों के साथ-साथ, स्वायत्त इकाईयों की

प्रास्थिति धारण करेंगे तथा रखे रहेंगे, तथा ऐसी शक्तियों और कृतियों के सिवाय,

जो संघ में निहित हैं या उसे सौंपे गए हैं, अथवा जो संघ में अन्तर्निहित या

अन्तर्जात हैं, या उसके परिणामस्वरुप उत्पन्न हैं, शासन या प्रशासन की सब

शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का पालन करेंगे_ तथा

  1. जिसमें प्रभुतासंपन्न स्वाधीन भारत की, उसके संघटकों की तथा शासन के अंगों

की संपूर्ण शक्ति और प्राधिकार जनता से प्राप्त किये जाते हैं_ तथा

  1. जिसमें भारत के सभी लोगों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय,

प्रास्थिति, अवसर की तथा विधि के समक्ष समता, विचार, अभिव्यक्ति, मत,

विश्वास, पूजा व्यवसाय तथा कार्रवाई की स्वतंत्रता प्राप्त और प्रत्याभूत होगी

और जो विधि और लोक नैतिकता के अधीन होगी_ तथा

  1. जिसमें अल्पसंख्यकों, पिछड़े और जनजातीय क्षेत्रों, दलितों और अन्य पिछड़े

वर्गों के लिए पर्याप्त रक्षा उपायों का उपबंध किया जाएगा_ तथा

  1. जिसके द्वारा न्याय तथा सभ्य राष्ट्रों की विधि के अनुसार गणराज्य के राज्य

क्षेत्र की अखंडता तथा भूमि, समुद्र और वायु पर उसके प्रभुतासंपन्न अधिकार

अक्षुण रखे जाएंगे_ तथा

  1. यह प्राचीन देश विश्व में अपना अधिकार और सम्मानजनक स्थान प्राप्त करता

  2. संविधान सभा वाद-विवाद (जिसे इसमें सी.एम.डी. कहा है) खण्ड 1, 13 दिसम्बर, 1946 पृष्ठ 59)।