1. लक्ष्य और उद्देश्य संबंधी संकल्प - Page 22

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है तथा विश्व शांति एवं मानव जाति के कल्याण की वृद्धि में सहर्ष अपना पूर्ण

योगदान प्रदान करता है।

(इसके बाद पंडित नेहरु, पुरुषोत्तम दास टंडन तथा डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के भाषण हुए। तत्पश्चात् सभा 16 दिसम्बर, 1946 तक के लिये स्थगित हो गई-संपादक)

(डॉ. एम.आर. जयकर ने 16 दिसम्बर, 1946 को उपरोक्त संकल्प में अपना संशोधन पेश किया-संपादक)

2 राइट माननीय डॉ. एम.आर. जयकर (बम्बई साधारण)ः सुनिये, मैं संशोधन को पढ़ता हूँ। मैं आपका कुछ मिनटों का समय बचाना चाहता था। संशोधन इस प्रकार हैः- ‘‘यह सभा दृढ़ संकल्प होकर घोषणा करती है कि भारत के भावी शासन के लिए इस सभा द्वारा तैयार किया जाने वाला संविधान स्वतंत्र और लोकतांत्रिक प्रभुतासम्पन्न राज्य के लिए होगा_ किन्तु ऐसे संविधान को साकार रुप देने में मुस्लिम लीग तथा देशी रियासतों का सहयोग प्राप्त करने की दृष्टि से तथा उसके द्वारा इस संकल्प को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दृष्टि से यह सभा इस प्रश्न पर बाद में विचार करेगी ताकि इन दो संगठनों के प्रतिनिधि यदि वे चाहें तो, इस सभा की कार्यवाही में भाग ले सकेंगे।’’

संक्षेप में, मेरे संशोधन का अभिप्राय यह है कि इस संकल्प पर विचार-विमर्श, संघीय संविधान के निर्माण के समय तक के लिए मुल्तवी किया जाए। मैं समझता हूँ कि उस समय देशी रियासतों और मुस्लिम लीग से उपस्थित रहने की आशा की जा सकती है। डॉ. एम.आर. जयकर ने संकल्प के समय पर आपत्ति की, उन्होंने संकल्प पारित करना मुल्तवी करने की मांग करते हुए एक संशोधन पेश किया क्योंकि वह चाहते थे कि संविधान के मूलतत्वों को निर्धारित करने के काम में मुस्लिम लीग भी शामिल रहे। इस बात पर सदन में तनावपूर्ण वातावरण व्याप्त हो गया। उस तनावपूर्ण वातावरण के बीच सभापति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने अचानक 17 दिसम्बर, 1946 को डॉ. अम्बेडकर को अपना मत प्रकट करने के लिए आमंत्रित किया। जब डॉ. अम्बेडकर ने बोलना आरंभ किया तो सदन ने उन्हें ध्यानमग्न होकर सुना।

डॉ. धनंजय कीर लिखते हैं- ‘‘सबने सोचा था कि डॉ. अम्बेडकर यह खतरनाक भूमिका निभाकर कांग्रेस के आला-कमान जो राष्ट्र के अत्यन्त शक्तिशाली नेता थे, की इच्छा और आक्षेपों के विरुद्ध खड़े होने के साथ संशोधन के प्रस्तुतकर्त्ता के साथ नीचे चले जाएंगे। यह उनका अंतिम प्रहार था। कांग्रेसी सदस्य अपने पक्के शत्रु को पंगु

2 . सी.ए.डी. खंड 1, 16 दिसम्बर, 1946 पृष्ठ 59, सी.एडी. खण्ड 1, 16 दिसम्बर, 1946 पृष्ठ 73।

सी.ए.डी. खंड 1, 17 दिसम्बर, 1946, पृष्ठ 99-103।