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अध्याय 4

राज्यपाल की विधायी शक्ति

विधानमंडल 187. (1) उस समय को छोड़कर जब किसी राज्य की विधानसभा के विश्रान्ति सत्र में है या विधान परिषद वाले राज्य में विधानमंडल के काल में अध्यादेश दोनों सदन सत्र में हैं, यदि किसी समय राज्यपाल का यह प्रख्यापित करने समाधान हो जाता है कि ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हैं की राज्यपाल जिनके कारण तुरंत कार्रवाई करना उसके लिए आवश्यक की शक्ति हो गया है तो वह ऐसे अध्यादेश प्रख्यापित कर सकेगा

जो उसे उन परिस्थितियों में अपेक्षित प्रतीत होंः

परंतु राज्यपाल, राष्ट्रपति के अनुदेशों के बिना, कोई ऐसा

अध्यादेश प्रख्यापित नहीं करेगा यदि वैसे ही उपबंध

अंतर्विष्ट करने वाले राज्य के विधानमंडल का अधिनियम

इस संविधान के उपबंधों के अधीन, अविधिमान्य हो तो

जब तक कि राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित किए

जाने पर उस पर राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त न हो गई

हो।

(2) इस अनुच्छेद के अधीन प्रख्यापित अध्यादेश का वही

बल और प्रभाव होगा जो राज्य के विधानमंडल के ऐसे

अधिनियम का होता है जिसे राज्यपाल ने अनुमति दे दी

है, किंतु प्रत्येक ऐसा अध्यादेशः

(क) राज्य को विधानसभा के समक्ष और विधान परिषद वाले

राज्य में दोनों सदनों के समक्ष रखा जाएगा तथा विधानमंडल

के पुनः समवेत होने से छह सप्ताह की समाप्ति पर या

यदि उस अवधि की समाप्ति से पहले विधानसभा उसके

अनुमोदन का संकल्प पारित कर देती है और यदि विधान

परिषद है तो वह उससे सहमत हो जाती है तो,

यथास्थिति, संकल्प के पारित होने पर या विधान परिषद

द्वारा संकल्प से सहमत होने पर प्रवर्तन में नहीं रहेगा_

और