1. लक्ष्य और उद्देश्य संबंधी संकल्प - Page 23

4 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

बनाकर नीचे गिराने के लिए अपने हाथ उठाये तत्पर थे।’’ इस ऐतिहासिक भाषण ने डॉ. अम्बेडकर के राजनीतिक जीवन का मार्ग ही बदल दिया। उस भाषण की प्रशंसा में बहुत देर तक, बहुत जोरदार करतल ध्वनि होती रही। जैसा कि इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी श्री एन.वी. गाडगिल ने मत व्यक्त किया था-‘‘उनका भाषण इतना राजनीतिक, मधुर और इतना उत्सुकताप्रद तथा चुनौतीपूर्ण था कि पूरी संविधान सभा ने इसे गद्गद् और शांत होकर सुना। उस भाषण का जोरदार तालियों से स्वागत किया गया और उनके पास बधाइयों का तांता लग गया।’’ उस भाषण का गहरा प्रभाव पड़ा और संविधान सभा ने उद्देश्यपरक संकल्प पर विचार करना अगले सत्र तक के लिए स्थगित कर दिया। (डॉ. अम्बेडकर का उक्त भाषण निम्न प्रकार है-संपादक)

सभापतिः डॉ. अम्बेडकर

डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (बंगालः साधारण)ः सभापति जी, मैं वास्तव में आपका अत्यन्त आभारी हूँ। कि आपका निमंत्रण एक आश्चर्य के रुप में है। मेरा विचार था कि चूंकि मुझसे आगे भी 20-22 व्यक्ति हैं, इसलिए यदि मेरी बोलने की बारी आई भी तो कल आयेगी। मैं, वही पसन्द करता क्योंकि आज तो मैं बिना किसी तैयारी के आया हूँ। मुझे स्वयं तैयारी करना अच्छा लगता क्योंकि मेरा इरादा था कि मैं ऐसे मौके पर एक पूर्ण वक्तव्य दूँ। साथ ही आपने 10 मिनट का समय निश्चित कर दिया है। इन सीमाओं में रहते हुए मैं नहीं जानता कि मैं प्रस्तुत संकल्प के प्रति कैसे न्याय कर सकूंगा! फिर भी, इस विषय पर मैं जो कुछ सोचता हूँ उसे कम से कम शब्दों में रखने का भरसक प्रयत्न करुंगा।

सभापति जी, कल से इस संकल्प पर जो विचार-विमर्श हो रहा है उसके प्रकाश में यह संकल्प प्रकटतः दो भागों में विभक्त किया जा सकता है। एक जो विवादग्रस्त है और दूसरा जो विवादग्रस्त नहीं है। जो भाग विवादग्रस्त नहीं है वह इस संकल्प के पैरा (5) और (7) से संबंधित है। इन पैराओं में इस देश के भावी संविधान के उद्देश्य अंकित हैं। मुझे यह अवश्य स्वीकार कर लेना चाहिए कि यह संकल्प पंडित जवाहरलाल नेहरु की ओर से आया है जो एक समाजवादी के रुप में विख्यात हैं। यह संकल्प यद्यपि विवाद के घेरे में नहीं है, फिर भी मेरे मतानुसार, यह बहुत निराशाजनक है। मुझे उनसे आशा थी कि वह संकल्प के उस भाग में जहां तक गये हैं उससे कहीं आगे तक जाते। इतिहास का छात्र होने के नाते मैं यह पसंद करता हूँ कि यह भाग संकल्प में समाविष्ट ही न किया जाता। यदि कोई संकल्प के इस भाग को पढ़े तो उसे उन मानवाधिकारों की घोषणा का स्मरण हो जाएगा जिनकी उद्घोषणा फ्रांसीसी संविधान सभा ने की थी। मेरे विचार में, मेरा यह सुझाव देना ठीक है कि वास्तव में 450 वर्ष बीतने के पश्चात्