202 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
परंतु इस अध्याय के निम्नलिखित उपबंधों के अनुसार
राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किन्हीं अतिरिक्त न्यायाधीशों के
साथ-साथ इस प्रकार नियुक्त न्यायाधीश, किसी भी
समय, संख्या में उससे अधिक नहीं होंगे जितने राष्ट्रपति
इस न्यायालय के संबंध में आदेश द्वारा नियत करे।
उच्च न्यायालय 193. (1) भारत के मुख्य न्यायमूर्ति से, उस राज्य के राज्यपाल से के न्यायाधीश और मुख्य न्यायमूर्ति से भिन्न किसी न्यायाधीश की की नियुक्ति और नियुक्ति की दशा में उस उच्च न्यायालय के मुख्य उसके पद की शर्ते न्यायमूर्ति से परामर्श करने के पश्चात् राष्ट्रपति अपने
हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा उच्च न्यायालय
के प्रत्येक न्यायाधीश को नियुक्त करेगा और वह न्यायालय
तब तक पद धारण करेगा जब तक वह 60 वर्ष की आयु
अथवा 65 वर्ष से अधिक ऐसी आयु * प्राप्त नहीं कर
लेता है जो कि निमित्त राज्य के विधानमंडल द्वारा विधि
द्वारा नियत की जाएः
परंतु-
(क) कोई न्यायालय राज्यपाल के संबोधित अपने हस्ताक्षर
सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा_
(ख) किसी न्यायाधीश को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों
को हटाने के लिए अनुच्छेद 103 के खंड (4) में
उपबंधित रीति से उसके पद से राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा
सकेगा_
(ग) किसी न्यायाधीश का पद राष्ट्रपति द्वारा उच्चतम न्यायालय
का या किसी अन्य उच्च न्यायालय का न्यायाधीश
नियुक्त किए जाने पर रिक्त हो जाएगा।
* 60 वर्ष से अधिक आयु का उपबंध भारत शासन अधिनियम, 1935 में विद्यमान नहीं है। परिणामस्वरूप
अधिवक्ताओं में से सर्वश्रेष्ठ आदमी प्रायः न्यायाधीश बनने से इंकार कर देते हैं क्योंकि वर्तमान 60
वर्ष की वर्तमान आयु-सीमा के अंतर्गत उन्हें पूरी पेंशन अर्जित करने का समय नहीं मिल पाएगा। यह
भी उल्लेख किया गया है कि जब उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की आयु-सीमा 65 वर्ष है तो
यह मानना संभव नहीं होगा कि वह 60 वर्ष के बाद इतना वृद्ध हो जाएगा कि वह उच्च न्यायालय के
लिए उपयुक्त नहीं रहेगा। विभिन्न राज्यों में विद्यमान भिन्न-भिन्न अवस्थाओं की दृष्टि से समिति ने इस
अनुच्छेद में रेखांकित शाब्द जोड़े हैं जिससे कि प्रत्येक राज्य का विधानमंडल 65 वर्ष से अधिक की
आयु-सीमा नियत कर सके।