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(2) कोई व्यक्ति किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रुप में नियुक्ति के लिए तभी अर्हित होगा जब वह भारत का नागरिक है_ और
(क) उसने किसी राज्य में जिससे या जिसके लिए उच्च न्यायालय है, कम से कम दस वर्ष तक कोई न्यायायिक पद धारण किया है_
(ख) किसी उच्च न्यायालय का या उत्तरोत्तर दो या अधिक ऐसे न्यायालयों का कम से कम दस वर्ष अधिवक्ता
रहा है।
स्पष्टीकरण 1ः इस खंड के प्रयोजनों के लिए-
(क) किसी उच्च न्यायालय का अधिवक्ता रहने की अवधि की संगणना करने में वह अवधि भी सम्मिलित की जाएगी जिसके दौरान किसी व्यक्ति ने अधिवक्ता होने के पश्चात् न्यायिक पद धारण किया है_
(ख) पहली अनुसूची के भाग 1 पर भाग 2 में तत्समय विनिर्दिष्ट राज्य में न्यायिक पद धारण करने की अवधि की संगणना करने में वह अवधि भी सम्मिलित की जाएगी जिसके दौरान कोई व्यक्ति न्यायिक पद धारण करने के पश्चात् किसी उच्च न्यायालय का अधिवक्ता रहा है इस संविधान के प्रारंभ के पूर्व की कोई अवधि भी सम्मिलित की जाएगी जिसके दौरान उसने किसी क्षेत्र में न्यायिक पद धारण किया है जो, 15 अगस्त, 1947 से पूर्व, भारत शासन अधिनियम, 1935 द्वारा यथा परिभाषित ब्रिटिश भारत में समाविष्ट था अथवा वह यथास्थिति ऐसे किसी क्षेत्र में किसी उच्च न्यायालय का अधिवक्ता
रहा है।
स्पष्टीकरण 2ः इस खंड के उपखंड (क) और (ख) में, उच्च न्यायालय के प्रतिनिर्देश का अर्थ इस प्रकार किया जाएगा कि उसमें पहली अनुसूची के भाग 3 में तत्समय विनिर्दिष्ट राज्य में किसी न्यायालय के प्रति निर्देश भी शामिल है जो इस संविधान के अनुच्छेद 103 और 106 के प्रयोजनों के लिए उच्च न्यायालय है।