अध्याय 7 - राज्यों के उच्च न्यायालय - Page 223

204 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

उच्चतम न्यायालय 194. खंड 103 के उपखंड (4) और (5) के उपबंध से संबंधित कुछ जहां-जहां उनमें उच्चतम न्यायालय के प्रति निर्देश है उपबंध का उच्च वहां-वहां उच्च न्यायालय के प्रति निर्देश प्रतिस्थापित न्यायालयों को करके उच्च न्यायालय के संबंध में वैसे ही लागू होंगे जैसे लागू होना वे उच्चतम न्यायालय के संबंध में लागू होते हैं। उच्च न्यायालयों 195. उच्च न्यायालय का न्यायाधीश होने के लिए नियुक्त के न्यायाधीशों प्रत्येक व्यक्ति अपना पद ग्रहण करने से पहले उस राज्य द्वारा पद ग्रहण के राज्यपाल या उसके द्वारा इस निमित्त व्यक्ति के समक्ष करने से पूर्व तीसरी अनुसूची में इस प्रयोजन के लिए दिए गए प्रारुप घोषणा के अनुसार घोषणा करेगा और उस पर हस्ताक्षर करेगा।

* ऐसे व्यक्ति 196. कोई व्यक्ति जिसने-

द्वारा जिसने (क) किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रुप में_ या किसी उच्च (ख) अधिवक्ता संघ में से भर्ती किए जाने पर उच्च न्यायालय न्यायालय के के अपर न्यायाधीश या अस्थायी न्यायाधीश के रुप में न्यायाधीश का पद धारण किया है, भारत राज्यक्षेत्र में किसी न्यायालय में पद धारण किया या किसी प्राधिकारी के समक्ष अभिवचन या कार्य नहीं है, न्यायालयों में या करेगा।

किसी प्राधिकारी के

समक्ष विधि व्यवसाय

करने का प्रतिषेध

न्यायाधीशों के 197. (1) प्रत्येक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ऐसे वेतन और वेतन आदि भत्तों के लिए तथा छुट्टियों और पेंशन की बाबत ऐसे

अधिकारों के लिए भी हकदार होंगे जो राज्य के

विधानमंडल द्वारा विधि द्वारा या के अधीन समय-समय

पर नियत किए जाएं और जब तक वे इस प्रकार नियत

नहीं किए जाते हैं, जब तक ऐसे वेतन और भत्तों के लिए

तथा छुट्टियों या पेंशन की बाबत अधिकारों के लिए

हकदार होंगे जो दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैंः

* . समिति की राय है कि कोई व्यक्ति जिसने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पद धारण किया

है, किसी न्यायालय में या किसी प्राधिकारी के समक्ष विधि व्यवसाय करने से प्रतिषेध किया जाना

चाहिए और इसी प्रकार वे व्यक्ति भी जिन्होंने अधिवक्ता संघ में से भर्ती किए जाने पर न्यायालय के

अपर न्यायाधीश या अस्थायी न्यायाधीश के रूप में पद धारण किया है, प्रतिषिद्ध किए जाने चाहिएं।