अध्याय 7 - राज्यों के उच्च न्यायालय - Page 225

206 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

न्यायाधीशों की संख्या को तत्समय बढ़ा देना चाहिए तो

राष्ट्रपति न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या के संबंध में

इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों के अधीन रहते हुए

सम्यक रुप से अर्हित व्यक्तियों को दो वर्ष से अनधिक

किसी अवधि के लिए जो वह कार्य विनिर्दिष्ट करे उस

न्यायालय के अपर न्यायाधीश नियुक्त कर सकेगा। * उच्च न्यायालयों 200. इस अध्याय में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, की बैठकों में किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति, किसी भी सेवानिवृत्त समय, इस अनुच्छेद के उपबंधों के अधीन रहते हुए न्यायाधीशों किसी व्यक्ति से उस न्यायालय के न्यायाधीश का पद की उपस्थिति धारित किया है, न्यायाधीश के रुप में बैठने और कार्य

करने के लिए अनुरोध कर सकेगा और इस प्रकार अनुरोध

किए गए प्रत्येक व्यक्ति को इस प्रकार पीठासीन होते हुए

और कार्य करते हुए, उस न्यायालय के न्यायाधीश की

संपूर्ण अधिकारिता, शक्तियां और विशेषाधिकार प्राप्त

होंगे, किंतु उसे अन्यथा उस उच्च न्यायालय का न्यायाधीश

नहीं समझा जाएगाः

परंतु जब तक यथापूर्वोक्त व्यक्ति उस उच्च न्यायालय के

न्यायाधीश के रुप में बैठने और कार्य करने को सहमति

नहीं दे देता है जब तक उस अनुच्छेद की कोई बात उससे

ऐसा करने की अपेक्षा करने वाली नहीं समझी

जाएगी।

विद्यमान उच्च 201. इस संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए और इस न्यायालयों की संविधान द्वारा समुचित विधानमंडल को प्रदत्त शक्तियों के अधिकारिता आधार पर उस विधानमंडल द्वारा बनाई गई किसी विधि

के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी विद्यमान उच्च

न्यायालय की अधिकारिता और उसमें प्रशासित विधि

तथा उस न्यायालय और उसके सदस्यों की बैठकों का

चाहे वे अकेले बैठे या खंड न्यायालयों में बैठे विनियमन

करने की शक्ति हैं, वही होंगी जो इस संविधान के प्रारंभ

से ठीक पहले थीः

* . सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति यूनाइटेड किंगडम व संयुक्त राज्य अमेरिका में नियुक्ति की प्रक्रिया

पर आधारित होगी।