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परंतु राजस्व संबंधी अथवा उसका संग्रहण करने में
आदिष्ट या किए गए किसी कार्य संबंधी विषय की
बाबत उच्च न्यायालयों में से किसी की आरंभिक अधिकारिता
का प्रयोग, इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले, जिस
किसी निर्बन्धन के अधीन था वह निर्बन्धन ऐसी
अधिकारिता के प्रयोग को ऐसे प्रारंभ के पश्चात् लागू
नहीं होगा।
कुछ रिट निकालने 202 (1) इस संविधान के अनुच्छेद 25 में अंतर्विष्ट किसी बात के की उच्च न्यायालय होते हुए भी, प्रत्येक उच्च न्यायालय को, उन राज्यक्षेत्रों की शक्ति में, सर्वत्र जिसके संबंध में वह अपनी अधिकारिता का
प्रयोग करता है, इस संविधान के भाग 3 द्वारा प्रदत्त
अधिकारों में से किसी को प्रवर्त्तित कराने के लिए और
किसी अन्य प्रयोजन के लिए, ऐसे निर्देश, आदेश या रिट
जिनके अंतर्गत बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध,
अधिकार, पृच्छा और उत्प्रेषण रिट है, या उनमें से कोई
निकालने की शक्ति होगी।
(2) इस अनुच्छेद के खंड (1) द्वारा उच्च न्यायालय को
प्रदत्त शक्ति इस संविधान के अनुच्छेद 25 के खंड (2)
द्वारा उच्चतम न्यायालय को प्रदत्त शक्ति के अल्पीकरण
में नहीं होगी।
उच्च न्यायालयों 203. (1) प्रत्येक उच्च न्यायालय को उन राज्य-क्षेत्रों में सर्वत्र के प्रशासनिक जिनके संबंध में वह अपनी अधिकारिता का प्रयोग करता कृत्य है, सभी न्यालयों का अधीक्षण करेगा।
(2) उच्च न्यायालय-
(क) ऐसे न्यायालयों से विवरणी मांग सकेगा_
(ख) ऐसे किसी न्यायालय से किसी वाद या अपील को समान
या वरिष्ठ अधिकारिता वाले किसी अन्य न्यायालय को
अंतरित करने का अथवा ऐसे किसी न्यायालय से ऐसा
वाद या अपील अपने पास लेने का निर्देश दे सकेगा_
(ग) ऐसे न्यायालयों की पद्धति और कार्यवाहियों को विनियमित
करने के लिए साधारण नियम बना सकेगा, और जारी कर
सकेगा तथा प्रारुप विहित कर सकेगा_ और