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उच्च न्यायालय 206. (1) पहली अनुसूची के भाग 2 में तत्समय विनिर्दिष्ट किसी का गठन या राज्य का विधानमंडल राज्य या उसके किसी भाग के पुनर्गठन करने लिए विधि द्वारा एक उच्च न्यायालय का गठन कर की शक्ति सकेगा अथवा उस राज्य या उसके किसी भाग के लिए
किसी विद्यमान उच्च न्यायालय का उसी रीति से पुनर्गठन
कर सकेगा अथवा जहां उस राज्य में दो उच्च न्यायालय
हैं वहां उन न्यायालयों को आमेलित कर सकेगा।
(2) जहां यथापूर्वोक्त, किसी न्यायालय का गठन किया जाता
है अथवा दो न्यायालयों का आमेलन किया जाता है वहां
उस राज्य विधानमंडल द्वारा बनाई गई विधि में-
(क) न्यायालय या न्यायालयों के सब वर्तमान न्यायाधीशों के
और न्यायालय या न्यायालयों को ऐसे वर्तमान अधिकारियों
और सेवकों के जो आवश्यक समझे जाएं, अपने-अपने
पदों पर बने रहने के लिए_ तथा
(ख) पुनर्गठित न्यायालय या नए न्यायालयों के समक्ष सभी
लंबित मामलों के चलाए जाने के लिए उपबंध किया
जाएगा, तथा अन्य ऐसे उपबंध अंतर्विष्ट हो सकेंगे जो
पुनर्गठन या आमेलन के कारण आवश्यक प्रतीत हो।
उच्च न्यायालयों 207. संसद विधि द्वारा-
की अधिकारिता (क) किसी उच्च न्यायालय की अधिकारिता का विस्तार_ या का विस्तार या (ख) किसी उच्च न्यायालय की प्रधान पीठ है, से भिन्न किसी उससे अपवर्जन राज्य से, अथवा किसी क्षेत्र से, जो उस राज्य के अंतर्गत
नहीं है, अपवर्जित कर सकेगीः
परंतु ऐसे किसी प्रयोजन के लिए कोई विधेयक संसद के
किसी भी सदन में तब तक पुरःस्थापित नहीं किया
जाएगा जब तक कि-
(1) जहां पहली अनुसूची के भाग 1 में तत्समय विनिर्दिष्ट
किसी राज्य तक या भाग 3 के खंड ‘क’ तक या ऐसे
राज्य के भीतर किसी क्षेत्र तक अधिकारिता का विस्तार
किया जाना है या अपवर्जन किया जाना है वहां ऐसे अन्य
राज्य की सम्मति प्राप्त न कर ली गई हो_ और