अध्याय 1 - विधायी संबंध, विधयी शक्तियों का वितरण - Page 239

220 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

अवशिष्ट विधायी 223. (1) संसद को किसी ऐसे विषय के संबंध में, जो समवर्ती शक्तियां सूची या राज्य सूची में प्रगणित नहीं है, विधि बनाने की

अनन्य शक्ति है।

(2) ऐसी शक्ति के अंतर्गत ऐसे कर के अधिरोपण के लिए

जो उन सूचियों में किसी में वर्णित नहीं है, विधि बनाने

की शक्ति हैं।

** पहली अनुसूची 224. संविधान के अनुच्छेद 217 के खंड (1) में किसी बात के भाग-3 को के होते हुए भी-

रियासतों विषयक (क) संसद इस संविधान के प्रारंभ की तारीख को विद्यमान कुछ विषयों की पहली अनुसूची के भाग 3 के तत्समय विनिर्दिष्ट किसी बाबत विधि बनाने राज्य या राज्यों के समूह में 31क और तार विषयक किसी की संसद की अधिकार की बाबत विधि बनाने की शक्ति तब तक नहीं शक्तियों पर निर्बंधन होगी जब तक कि ऐसा अधिकार भारत सरकार और उस

राज्य या राज्यों के समूह के बीच करार द्वारा निर्वाचित

नहीं हो जाता है या भारत सरकार द्वारा अर्जित नहीं कर

लिया जाता हैः

परंतु इस खंड में की कोई बात संसद को ऐसे राज्य या

राज्यों के समूह में डाक और तार के विनियमन तथा

नियंत्रण के लिए कोई विधि बनाने से निवारित नहीं

करेगी ।

(ख) पहली अनुसूची के भाग 3 में तत्समय विनिर्दिष्ट किसी

रियासत में दूरभाष बेतार, प्रसारण की बाबत विधियां और

संचार अथवा अन्य वैसे ही प्रारुप बनाने की संसद की

शक्ति का विस्तार उनके विनियमन और नियंत्रण के लिए

विधियां बनाने तक ही होगा।

(ग) निगमों की बाबत विधियां बनाने की संसद की शक्ति के

अंतर्गत पहली अनुसूची के भाग 3 में तत्समय विनिर्दिष्ट

किसी राज्य के स्वामित्व और नियंत्रण के निगमों के

निगमन, विनियमन और परिसमापन तथा केवल इस

* . समिति की राय है कि इस अध्याय के कुछ अनुच्छेदों को संविधान के संविधान सभा द्वारा अंतिम रूप

से पारित किए जाने से पूर्व फिर से व्यवस्थित करना होगा।