अध्याय 1 - विधायी संबंध, विधयी शक्तियों का वितरण - Page 240

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रियासत के भीतर कारोबार चलाने के संबंध में विधि

बनाने की शक्ति नहीं होगी।

पहली अनुसूची 225. इस अध्याय में किसी बात के होते हुए भी, पहली के भाग 3 की अनुसूची के भाग 3 में तत्समय विनिर्दिष्ट किसी रियासत रियासतों के लिए या रियासतों के समूह के लिए विधियां बनाने की संसद विधान बनाने की की शक्ति उस रियासत या रियासतों के समूह द्वारा भारत शक्ति का विस्तार सरकार के साथ-साथ उस निमित्त किए गए किसी करार

के निबंधनों तथा उसमें अंतर्विष्ट परिसीमाओं के अधीन

होगा।

* राष्ट्रीय हित 226. इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते में राज्य सूची हुए भी, यदि राज्यसभा ने इस संकल्प द्वारा जो उपस्थित के किसी विषय और मतदान करने वाले कम से कम दो तिहाई सदस्यों के संबंध में द्वारा समर्थित हो, कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या विधायन संसद समीचीन है कि संसद को संकल्प में विनिर्दिष्ट राज्य की शक्ति सूची में प्रगणित किसी विषय के संबंध में विधि बनानी

चाहिए तो उस विषय के संबंध में भारत के राज्यक्षेत्र के

लिए पूर्णतः या भागतः विधि बनाना संसद के लिए विधि

पूर्ण होगा।

यदि आपात 227. (1) इस अध्याय में किसी बात के होते हुए भी, संसद को, उद्घोषणा जब आपात उद्घोषणा प्रवर्तनशील है, राज्य सूची में प्रवर्तनशील है प्रगणित किसी भी विषय के संबंध में भारत के राज्यक्षेत्र तो राज्य सूची के लिए पूर्णतः या भगतः विधि बनाने की शक्ति होगी। के किसी विषय (2) संसद द्वारा बनाई गई विधि, जिसे यदि आपात उद्घोषणा के संबंध में जारी न की जाती तो संसद बनाने के लिए सक्षम न होती, विधायन की असंगति की सीमा तक, उक्त अवधि बीतने के पूर्व की संसद की शक्ति गई या न की गई बातों को छोड़कर, उद्घोषणा के

प्रवर्तनशील न रहने के पश्चात् छह मास की अवधि की

समाप्ति पर प्रभावी नहीं रहेगी।

* . समिति की राय है कि जब राज्य सूची का कोई विषय राष्ट्रीय महत्व का हो जाए तो उसके संबंध

विधायन करने के लिए संसद के लिए शक्ति का उपबंध किया जाना चाहिए और इस अनुच्छेद को

इसी प्रयोजन के लिए अंतःस्थापित किया है।