अध्याय 2 - प्रशासनिक संबंध - Page 245

226 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

कुछ दशाओं में 235. (1) इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी राज्यों को शक्ति राष्ट्रपति, किसी राज्य की सरकार की सहमति से उस प्रदान करने सरकार को या उसके अधिकारियों को ऐसे किसी विषय आदि की से संबंधित कृत्य, जिन पर संघ की कार्यपालिका शक्ति

का विस्तार है, सशर्त या बिना शर्त सौंप सकेगा।

(2) संसद द्वारा बनाई गई विधि, जो किसी राज्य पर लागू होती

है ऐसे विषय से संबंधित होने पर भी, जिसके संबंध में

राज्य के विधानमंडल को विधि बनाने की शक्ति नहीं

है, उस राज्य या उसके अधिकारियों और प्राधिकारियों को

शक्ति प्रदान कर सकेगी और उन पर कर्तव्य अधिरोपित

कर सकेगी या शक्तियों का प्रदान किया जाना और

कर्तव्यों का अधिरोपित किया जाना प्राधिकृत कर सकेगी।

(3) जहां इस अनुच्छेद के आधार पर किसी राज्य अथवा

उसके अधिकारियों या प्राधिकारियों को शक्तियां प्रदान

की गई हैं या उन पर कर्तव्य अधिरोपित किए गए हैं वहां

उन शक्तियों और कर्तव्यों के प्रयोग के संबंध में राज्य

द्वारा प्रशासन में किए गए अतिरिक्त खर्चों के संबंध में

भारत सरकार द्वारा उस राज्य को ऐसी राशि का, जिसे

भारत के मुख्य न्यायमूर्ति द्वारा नियुक्त मध्यस्थ अवधारित

करे, संदाय किया जाएगा।

कुछ राज्यों में 236. (1) भारत सरकार, पहली अनुसूची के भाग 3 में तत्समय विधायी, कार्यपालक विनिर्दिष्ट किसी रियासत के साथ करार द्वारा, किन्तु संघ और न्यायिक कृत्यों और ऐसी रियासत के बीच संबंधों के बारे में उस का भार अपने ऊपर संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उस राज्य में लेने की संघ की निहित किसी कार्यपालक, विधायी या न्यायिक कृत्यों का शक्ति भार अपने ऊपर ले सकेगी।

(2) भारत सरकार पहली अनुसूची में तत्समय न विनिर्दिष्ट

किसी देशी रियासत की सरकार के साथ ऐसा करार भी

कर सकेगी, किन्तु ऐसा प्रत्येक करार तत्समय प्रवृत्त

विदेशी अधिकारिता के प्रयोग से संबंधित किसी विधि के

अधीन होगा और उसके द्वारा शासित होगा।