227
स्पष्टीकरण- इस खंड में ‘देशी रियासत’ से ऐसा कोई
राज्यक्षेत्र अभिप्रेत है जो भारत के राज्यक्षेत्र का भाग नहीं
है जिसे राष्ट्रपति ऐसी रियासत के रुप में मानता है।
(3) यदि इस अनुच्छेद के खंड (1) के अधीन किसी
रियासत के साथ किया गया करार ऐसे किसी विषय के
बारे में उपबंध करता है जिसके संबंध में पहली अनुसूची
के भाग 1 में तत्समय विनिर्दिष्ट किसी राज्य की सरकार
द्वारा इस संविधान के अनुच्छेद 237 के अधीन ऐसे किसी
राज्य के साथ किए गए किसी करार में पहले ही उपबंध
किया जा चुका है तो पश्चात्कथित करार, जहां तक ऐसे
विषय के लिए उपबंध करता है, वहां तक, प्रतिसंहृत
किया गया समझा जाएगा और पूर्वकथित करार के
सम्पन्न होने की तारीख को या उससे उसका कोई प्रभाव
नहीं होगा।
(4) संघ और पहली अनुसूची के भाग-3 में तत्समय विनिर्दिष्ट
किसी रियासत के बीच करार के इस अनुच्छेद के खंड
(1) के अधीन सम्पन्न हो जाने पर-
(क) संघ की कार्यपालक शक्ति का विस्तार ऐसे करार में उस
निमित्त विनिर्दिष्ट किसी विषय तक होगा_
(ख) संसद को ऐसे करार में उस निमित्त में विनिर्दिष्ट किसी
विषय के संबंध में विधि बनाने की शक्ति होगी_
और
(ग) भारत के उच्चतम न्यायालय को इस संविधान के अनुच्छेद
114 के खंड (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, ऐसे
करार में उस निमित्त विनिर्दिष्ट किसी विषय के संबंध में
अधिकारिता होगी।
पहली अनुसूची 237. (1) राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी से, पहली अनुसूची के भाग 1 के भाग 1 के में तत्समय विनिर्दिष्ट किसी राज्य की सरकार, पहली राज्यों की, पहली अनुसूची के भाग 3 में तत्समय विनिर्दिष्ट किसी रियासत अनुसूची के भाग 3 के साथ उस निमित्त किए गए करार द्वारा, पश्चात्कथित की किसी रियासत रियासत में निहित किन्हीं विधायी, कार्यपालक या न्यायिक के विधायी, कार्यपालक कृत्यों का भार अपने ऊपर लेने में सक्षम होगी, यदि