अध्याय 2 - प्रशासनिक संबंध - Page 247

228 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

और न्यायिक कृत्यों ऐसा करार ऐसे विषय के संबंध में है, जो राज्य सूची या का भार अपने ऊपर समवर्ती सूची में दिया गया है।

लेने की शक्ति (2) पहली अनुसूची के भाग 1 में तत्समय विनिर्दिष्ट किसी

राज्य और उसी अनुसूची के भाग 3 में तत्समय विनिर्दिष्ट

किसी रियासत के बीच सम्पन्न हुए इस अनुच्छेद के खंड

(1) के अधीन करार होने पर-

(क) उक्त अनुसूची के भाग 1 में विनिर्दिष्ट राज्य की

कार्यपालक शक्ति का विस्तार ऐसे करार में उस निमित्त

विनिर्दिष्ट किसी विषय तक होगा_

(ख) उक्त अनुसूची के भाग-1 में विनिर्दिष्ट राज्य के विधान

-मंडल को ऐसे करार में उस निमित्त विनिर्दिष्ट किसी

विषय के संबंध में विधि बनाने की शक्ति होगी_

तथा

(ग) उक्त अनुसूची के भाग 1 में विनिर्दिष्ट राज्य में उच्च

न्यायालय और अन्य समुचित न्यायालयों को ऐसे करार में

उस निमित्त विनिर्दिष्ट किसी विषय के संबंध में अधिकारिता

होगी।

* लोक कृत्य, 238. (1) भारत के राज्यक्षेत्र में सर्वत्र, संघ के और प्रत्येक राज्य के अभिलेख और लोक कृत्यों, अभिलेखों और न्यायिक कार्यवाहियों को न्यायिक कार्यवाहियां पूरा विश्वास और पूरी मान्यता दी जाएगी।

(2) खंड (1) में निर्दिष्ट कार्यों, अभिलेखों और कार्यवाहियों

को साबित करने की रीति और शर्ते तथा उनके प्रभाव का

अवधारण संसद द्वारा बनाई गई विधि द्वारा उपबंधित रीति

के अनुसार किया जाएगा।

(3) भारत के राज्यक्षेत्र के किसी भाग में सिविल न्यायालयों

द्वारा दिए गए अंतिम निर्णयों का आदेशों का उस राज्य

* . समिति की राय है कि यह अनुच्छेद मूल अधिकारों विषय भाग 3 के बजाय इस अध्याय में शमिल

किया जाना चाहिए।

समिति की यह भी राय है कि पहली अनुसूची के भाग 3 में तत्समय विनिर्दिष्ट प्रत्येक रियासत के संबंध

में इस अनुच्छेद के उपबंधों को प्रभावी रूप नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि समवर्ती सूची में प्रगणित

विषयों जैसे, सिविल प्रक्रिया, दंड प्रक्रिया और साक्ष्य से संबंधित विधियां विभिन्न राज्यों में भिन्न-भिन्न

हो सकती हैं। अतः समिति ने इस खंड का पुनरीक्षण किया है ताकि इन्हें समवर्ती सूची में ऐसे विषय

के संबंध में उन्हीं राज्यों में लागू किया जाए जिन्होंने संघ के समक्ष अध्यर्पण कर दिया है।