अध्याय 1 - वित्त - संघ और राज्यों के बीच राजस्वों का वितरण - Page 253

234 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

भाग 10

वित्त, सम्पत्ति, संविदाएं और वाद

अध्याय 1-वित्त

* संघ और राज्यों के बीच राजस्वों का वितरण

निर्वाचन 247. इस भाग में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न

हो तब तक-

(क) ‘‘वित्त आयोग’’ से ऐसा वित्त आयोग अभिप्रेत है जो

इस संविधान के अनुच्छेद 260 के अधीन गठित किया

गया हो_

(ख) ‘‘राज्य’’ के अंतर्गत पहली अनुसूची के भाग 2 में

तत्समय विनिर्दिष्ट राज्य नहीं है_

(ग) पहली अनुसूची के भाग 1 में तत्समय विनिर्दिष्ट राज्यों

के प्रति निर्देशों के अंतर्गत पहली अनुसूची के भाग 4 में

विनिर्दिष्ट किसी राज्यक्षेत्र तथा अन्य किसी राज्यक्षेत्र, जो

भारत के राज्यक्षेत्र में समाविष्ट हैं किन्तु उस अनुसूची

में विनिर्दिष्ट नहीं है के प्रति निर्देश भी होंगे। ‘‘भारत के राजस्व’’ 248. कुछ करों और शुल्कों के शुद्ध आगामों को सम्पूर्णतः या और ‘‘राज्य के भागतः राज्यों को सौपने के संबंध में इस अध्याय के राजस्व’’ का अर्थ निम्नलिखित उपबंधों के अधीन रहते हुए ‘‘भारत के

राजस्व’’ पद के अंतर्गत समस्त राजस्व और धन हैं जो

भारत सरकार द्वारा जुटाए गए या प्राप्त किए गए हों तथा

* समिति ने संघ और राज्यों के बीच राजस्व वितरण के विषय में संविधान के वित्तीय उपबंधों की विशेषज्ञ

समिति की सिफारिशों प्रारुप में शमिल नहीं की हैं, क्योंकि समिति की राय है कि फिलहाल अस्थिर

हालात की दृष्टि से भारत शासन अधिनियम, 1935 के अधीन ऐसे राजस्वों का विद्यमान वितरण कम

से कम पांच वर्ष तक चालू रहना चाहिए। उसके पश्चात् एक वित्त आयोग स्थिति की समीक्षा कर

सकता है। समिति विशेषज्ञ समिति की इस बात से सहमत है कि विशेषज्ञ समिति