अध्याय 1 - वित्त - संघ और राज्यों के बीच राजस्वों का वितरण - Page 256

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(ii) वित्त आयोग का गठन किए जाने के पश्चात्, वित्त

आयोग की सिफारिशों पर विचार करने के पश्चात्

राष्ट्रपति द्वारा आदेश द्वारा विहित_

(ग) ‘‘संघ की उपलब्धि’’ के अंतर्गत भारत के राजस्व में से

संदेय ऐसी सभी उपलब्धियां और पेंशन हैं जिनके संबंध

में आय-कर प्रभार्य है।

कुछ शुल्कों 252. अनुच्छेद 250 और अनुच्छेद 251 में किसी बात के होते और करों पर हुए भी संसद उन अनुच्छेदों में निर्दिष्ट शुल्कों या करों में संघ के प्रयोजनों से किसी में किसी भी समय संघ के प्रयोजनों के लिए के लिए अधिभार अधिभार द्वारा वृद्धि कर सकेगी और किसी ऐसे अधिभार

के संपूर्ण आगम भारत के राजस्व के भाग होंगे।

* कर जो संघ 253. (1) संघ द्वारा नमक पर कोई शुल्क उद्गृहित नहीं किया द्वारा उद्गृहीत जाएगा।

और संगृहीत किए (2) संघ सूची में वर्णित औषधीय और प्रसाधन निर्मितियों पर जाते हैं तथा जो उत्पाद-शुल्क से भिन्न संघ उत्पाद-शुल्क भारत सरकार संघ और राज्यों के द्वारा उद्गृहीत और संगृहीत किए जाएंगे किंतु यदि संसद बीच वितरित विधि द्वारा इस प्रकार उपबंध करती है तो जिन राज्यों पर किए जा सकेंग े शुल्क अधिरोपित करने वाली विधि का विस्तार है उन

राज्यों को भारत के राजस्व में से उस शुल्क के संपूर्ण

शुद्ध आगमों के या उनके किसी भाग के बराबर राशियां

संदत्त की जाएंगी और ये राशियां वितरण के ऐसे सिद्धांतों

के अनुसार, जो उस विधि द्वारा बनाए जाएं, उन राज्यों के

बीच वितरित की जाएंगी।

जूट पर या जूट 254. इस संविधान के अनुच्छेद 253 में किसी बात के होते हुए उत्पादों पर शुल्क भी जूट पर या जूट उत्पादों पर किसी निर्यात शुल्क के का वितरण प्रत्येक वर्ष के शुद्ध आगमों का ऐसा अनुपात जो संसद

विधि द्वारा अवधारित करे, भारत के राजस्व का भाग नहीं

होगा किन्तु उन राज्यों को जिनमें जूट की पैदावार होती

है, वितरण के ऐसे सिद्धांतों के अनुसार सौंपा जाएगा जो

* समिति के सदसयों में से बहुमत की राय है कि नमक पर षुल्क के बारे में कोई प्रतिषेध नहीं होना

चहिए और उसका उदग्रहण संसद के विवेक पर छोड़ देना चाहिए और तदनुसार इस अनुच्छेद का खंड

(1) आवश्यक नहीं है किंतु अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर की राय है कि यह खंड रखा जाए।