अध्याय 1 - वित्त - संघ और राज्यों के बीच राजस्वों का वितरण - Page 257

238 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

ऐसी विधि द्वारा बनाए जाएंः

परंतु जब तक संसद इस प्रकार अवधारित नहीं करती है तब तक प्रत्येक वर्ष शुल्क के शुद्ध आगमों में से उन राज्यों को उनका ऐसा भाग और ऐसे अनुपात में जो भारत शासन अधिनियम, 1935 के अधीन किए गए और इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पूर्व प्रवृत्त किसी आदेश द्वारा इसके विवेक पर छोड़ देना चाहिए।

कुछ राज्यों को 255. ऐसी राशियां, जिनका संसद विधि द्वारा उपबंध करे, उन संघ से अनुदान राज्यों के राजस्वों में सहायता अनुदान के रुप में प्रत्येक वर्ष भारत के राजस्व पर भारित होंगी जिन राज्यों के विषय में संसद यह अवधारित करे कि उन्हें सहायता की आवश्यकता है और भिन्न-भिन्न राज्यों के लिए भिन्न-भिन्न राशियां नियत की जा सकेगीः

परंतु पहली अनुसूची के भाग 1 में तत्समय विनिर्दिष्ट किसी राज्य के राजस्वों में सहायता अनुदान के रुप में भारत के राजस्व में ऐसी पूंजी और आवर्ती राशियां संदत्त की जाएंगी जो उस राज्य को उन विकास स्कीमों के खर्चों को पूरा करने में समर्थ बनाने के लिए आवश्यक स्तर को उसे राज्य के शेष क्षेत्रों के प्रशासन स्तर तक उन्नत करने के प्रयोजन के लिए उस राज्य द्वारा भारत सरकार के अनुमोदन से हाथ में लिया जाएः

परंतु यह और कि असम राज्य के राजस्व में सहायता अनुदान के रुप में भारत के राजस्व में से ऐसी पूंजी और आवर्ती राशियां संदत्त की जाएंगी-

(क) जो छठी अनुसूची के पैरा 19 से संलग्न सारणी के भाग 1 में विनिर्दिष्ट जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के संबंध में इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पूर्ववर्ती तीन वर्ष के दौरान औसत व्यय राजस्व से जितना अधिक है, उसके बराबर है_ और

(ख) जो उन विकास स्कीमों के खर्चों के बराबर है जिन्हें उक्त क्षेत्रों के प्रशासन स्तर को उस राज्य के शेष क्षेत्रों के प्रशासन स्तर तक उन्नत करने के प्रयोजन के लिए उस