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जा सकता। यह कतई कानूनी सवाल नहीं है। हमें सब कानूनी बातों को छोड़कर ऐसा प्रयास करना चाहिए जिससे वे भी हमारे साथ आ जाएं, जो आने के लिए तैयार नहीं हैं। आइए, उनका साथ चलना संभव बनाएं। मेरी यही अपील है।
जो वाद-विवाद हुआ था उसके दौरान दो सवाल उठाये गए थे जो मुझे इतने महत्वपूर्ण लगे कि मैंने उन्हें एक कागज के टुकड़े पर अंकित करने का श्रम किया। मेरे विचार में, एक सवाल मेरे मित्र बिहार के प्रधानमंत्री का था जो इस सभा में कल बोले थे। उन्होंने कहा था, यह संकल्प लीग को संविधान सभा में आने से कैसे रोक सकता है? आज मेरे मित्र डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने एक दूसरा सवाल पूछा है-क्या वह संकल्प कैबिनेट मिशन के प्रस्ताव से असंगत है? श्रीमान्, ये बहुत महत्वपूर्ण सवाल हैं, इनका उत्तर दिया जाना चाहिए और साफ-साफ दिया जाना चाहिए। मेरा आज भी यह कहना है कि यह संकल्प फलीभूत हो या नहीं पर क्या इसमें गर्मजोशी का अभाव झलकता है अथवा क्या यह संयोग की बात है कि इसकी वजह से मुस्लिम लीग संविधान सभा में भाग नहीं लेगी। इस संदर्भ में मैं आपका ध्यान पैरा तीन की ओर दिलाना चाहता हूँ। पैरा 3 भारत के भावी संविधान की परिकल्पना करता है। मैं नहीं जानता कि संकल्प पेश करने वाले क्या आशय था। लेकिन मैं यह मानता हूँ कि संकल्प के पैरा 3 के अनुसार, इस संकल्प के पारित हो जाने के बाद यह संविधान सभा के लिए, संविधान का निर्माण करने के निदेशक तत्व जैसा होगा। पैरा 3 का क्या कहना है? पैरा 3 में लिखा है कि इस देश में दो प्रकार की राजनीतिक व्यवस्था होगी एक सबसे निचले स्तर पर स्वायत्त प्रांत या राज्य या अन्य ऐसे क्षेत्र जो अखंड भारत में शामिल होना चाहते हैं। इन स्वायत्त इकाइयों को पूरी शक्ति प्राप्त होगी। उन्हें अविशिष्ट शक्तियाँ भी प्राप्त होंगी। दूसरी सर्वोच्च स्तर पर जिसमें प्रान्तीय इकाइयों के ऊपर संघ सरकार होगी जिसके पास विधायन, कार्यान्वयन और प्रशासन के लिए कुछ विषय होंगे। मैंने संकल्प के इस भाग को पढ़ा है किन्तु मुझे इसमें समूहीकरण के विचार का एक ओर संघ तथा दूसरी ओर प्रांतों के बीच मध्यवर्ती ढांचे का कोई हवाला दिखाई नहीं पड़ता। कैबिनेट मिशन के वक्तव्य के प्रकाश में पढ़ने पर या वर्धा अधिवेशन में कांग्रेस द्वारा पारित संकल्प के प्रकाश में भी इस पैरे को पढ़ने के बाद मैं यह अवश्य स्वीकार करुंगा कि प्रांतों के समूहीकरण के विचार के किसी हवाले के न होने पर मैं बहुत अधिक आश्चर्यचकित हूँ। जहां तक मेरा अपना संबंध है, मुझे केन्द्र में समूहीकरण का ख्याल पसन्द नहीं है। (सुनिये, सुनिये) मुझे एक मजबूत एकीकृत केन्द्र पसन्द है (सुनिये, सुनिये) उस केन्द्र से भी अधिक मजबूत, जो हमने भारत शासन अधिनियम, 1935 के अधीन सर्जित किया था। लेकिन, श्रीमान्, इनका इस स्थिति से कतई संबंध नहीं है। हम काफी लम्बा रास्ता तय कर चुके है। कांग्रेस पार्टी ने, न जाने किन कारणों से, एक मजबूत केन्द्र को खंडित