अध्याय 1 - वित्त - संघ और राज्यों के बीच राजस्वों का वितरण - Page 264

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राज्य सरकार की सामान्य कृत्यों को आनुषांगिक कोई क्रियाएं जैसे किसी राज्य की सरकार के नियंत्रणाधीन वन उत्पादों की उपज का अथवा किसी राज्य के भीतर किसी जिले में उत्पादित किसी वस्तु का विक्रय उस राज्य की सरकार द्वारा या की ओर से चलाए जाने वाला व्यापार या कारोबार नहीं समझा जाएगा।

कुछ व्ययों 267. जहां इस संविधान के उपबंधों के अधीन किसी न्यायालय और पेंशनों के या आयोग के व्यय अथवा किसी व्यक्ति को या उसके संबंध में समायोजन संबंध में, जिसने इस संविधान के प्रारंभ से पहले भारत में क्राउन के अधीन अथवा ऐसे प्रारंभ के पश्चात् संघ के या किसी राज्य के कार्यकलाप के संबंध में सेवा की है, संदेय पेंशन भारत के राजस्व या पहली अनुसूची के भाग 1 में तत्समय विनिर्दिष्ट किसी राज्य की राजस्व पर भारित है वहां, यदिः-

(क) भारत के राजस्व पर भारित होने की दशा में, वह न्यायालय या आयोग इस प्रकार विनिर्दिष्ट किसी राज्य की पृथक आवश्यकताओं में से किसी की पूर्ति करता है या उस व्यक्ति ने किसी राज्य के कार्यकलाप के संबंध में पूर्णतः या भागतः सेवा की है_ या

(ख) किसी राज्य के राजस्व पर भारित होने की दशा में, वह न्यायालय या आयोग संघ की या इस प्रकार विनिर्दिष्ट अन्य राज्य की पृथक आवश्यकताओं में से किसी की पूर्ति करता है या उस व्यक्ति ने संघ या ऐसे अन्य राज्य के कार्यकलाप के संबंध में पूर्णतः या भागतः सेवा की

है।

तो, यथास्थिति, उस राज्य के राजस्व पर अथवा, भारत के राजस्व अथवा अन्य राज्य के राजस्व पर, व्यय या पेंशन के संबंध में उतना अंशदान, जितना करार पाया जाए या करार के अभाव में जितना भारत के मुख्य न्यायमूर्ति द्वारा नियुक्त मध्यस्थ अवधारित करे, भारित किया जाएगा और उसका उस निधि से संदाय किया जाएगा।